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ठेकेदार की गाड़ी पर चलते हैं गिरिडीह के मेयर सुनिल पासवान

काजल रंजन की है गाड़ी, सवालों के घेरे में गिरिडीह के मेयर

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Giridih : गिरिडीह के मेयर सुनिल पासवान जिस वाहन का उपयोग करते हैं, वह उनके या नगर निगम के नाम पर नहीं, बल्कि एक ठेकेदार के नाम पंजिकृत है. चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त वाहन पर मेयर का बोर्ड लगा है और इसका उपयोग मेयर अपने सरकारी कार्यों के लिए करते हैं. फेसबुक में पर्दाफाश नामक ग्रुप चलाने वाले प्रभाकर ने यह खुलासा किया है.इस बात के खुलासे से मेयर और नगर निगम को कोई सफाई देते नहीं बन रहा है. लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या ठेकेदार ने काम पाने के ऐवज में रिश्वत के तौर पर उक्त वाहन को दिया है. कारण जो भी हो, इस खुलासे से मेयर और गिरिडीह नगर निगम दोनों सवालों के घेरे में आ चुके हैं. गौरतलब है कि गिरिडीह के मेयर सुनिल पासवान और उपमेयर प्रकाश सेठ दोनों भाजपा के हैं.

गिरिडीह मेयर की गाड़ी का विवरण

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ठेकेदार के नाम रजिस्टर्ड है मेयर की गाड़ी

डीटीओ कार्यालय से पता चला है कि गिरिडीह मेयर द्वारा विभागीय तौर पर इस्तमाल की जा रही टोयटा की इनोवा JH11W-7777 नंबर की गाड़ी गिरिडीह के काजल रंजन के नाम रजिस्टर्ड है.काजल रंजन नगर निगम के चेहते ठेकेदार हैं.उन्हें निगम के ओर से करोड़ों का काम मिला हुआ है. हाल ही में नगर क्षेत्र में वाहन पार्किंग शुल्क वसूलने का ठेका भी काजल रंजन को ही मिला है. नगर निगम के चुनाव के एक माह बाद ही लोगों ने मेयर को उक्त गाड़ी का आधिकारिक उपयोग करते देखा.तब सभी को लगा कि यह गाड़ी उन्होंने निजी तौर पर खरीदी होगी या फिर विभाग ने उपलब्ध कराया होगा. मगर अब इस खुलासे से लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं. लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि अब नगर निगम पूरी तरह से ठेकेदारों की मुट्ठी में हैं.

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नगर निगम की सफाई

इधर इस मामले में मेयर और नगर निगम आयुक्त ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अन्य ठेकेदारों के मार्फत सफाई दी जा रही है कि मेयर ने ठेकेदार से भाड़े पर गाड़ी ली है. अगर यह सही भी तो फिर सवाल उठता है कि निगम के ठेकेदार से ही भाड़े पर गाड़ी क्यों ली. नियम के मुताबिक कोई भी निजी गाड़ी मालिक उसका व्यवसायिक लाभ नहीं ले सकता.

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