lok sabha election 2019

गिरिडीह लोकसभाः क्या केले को भेद सकेगा तीर

Akshay Kumar Jha

Ranchi/Bermo: देश में 6ठवें चरण का चुनाव 12 मई को होनेवाला है. झारखंड के लिए इसे तीसरा चरण माना जायेगा. 12 मई को गिरिडीह, जमशेदपुर, चाईबासा और धनबाद में चुनाव होना है. इन चारों जगहों में सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर गिरिडीह लोकसभा पर तय मानी जा रही है. इस बार गिरिडीह लोकसभा सीट से रवींद्र पांडेय का टिकट काट कर बीजेपी ने आजसू से गठबंधन किया है. आजसू की तरफ से झारखंड सरकार के मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी मैदान में हैं. वहीं महागठबंधन की तरफ से जेएमएम के टिकट पर जगरनाथ महतो एक ताकतवर उम्मीदवार के रूप में चुनावी प्रचार में जुटे हैं. चंद्रप्रकाश चौधरी को क्षेत्र में बीजेपी का साथ मिल रहा है. मोदी लहर के नाम पर श्री चौधरी अपनी नैया पार करने की जुगत में हैं.

इसे भी पढ़ें – पांच फेज के रूझानों के बाद नये राजनीतिक समीकरणों की संभावना की तलाश का दौर

समझिए विधानसभा के मुताबिक समीकरण

गिरिडीह लोकसभा में छह विधानसभा आते हैं. बेरमो से बीजेपी विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, गोमिया से जेएमएम विधायक बबीता देवी, टुंडी से आजसू विधायक राज किशोर महतो, बाघमारा से बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो, डुमरी से जेएमएम विधायक जगरनाथ महतो और गिरिडीह से बीजेपी विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान समीकरण कुछ बदला सा है. फिलवक्त जो समीकरण बनते दिख रहे हैं, उसमें बेरमो, डुमरी और टुंडी से जगरनाथ महतो को काफी बढ़त मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है. वहीं गोमिया, गिरिडीह और बाघमारा से चंद्रप्रकाश चौधरी को बढ़त मिलती दिख रही है. ऐसे में दोनों विधायकों के बीच टक्कर काफी क्लोज माना जा रहा है.

इसे भी पढ़ें – मोदी सरकार के पांच सालों में कितना स्वतंत्र रह पाया सुप्रीम कोर्ट

समझिए जातीय समीकरण

महतो बाहुल्य इस क्षेत्र में दोनों उम्मीदवार चाहेंगे कि उन्हें उनकी जाति के वोट तो जरूर मिलें. वैसे भी गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र महतो की राजनीति के लिए शुरू से जाना जाता है. स्व. बिनोद बिहारी महतो की राजनीतिक सक्रियता इसी क्षेत्र में रही है. उन्हीं की विरासत जगरनाथ महतो पूरी तरह से अपना करना चाह रहे हैं. इस बीच सुदेश महतो की चाहत है कि गिरिडीह की विरासत अगर महतो को ही जानी है तो आजसू से बेहतर क्या होगा. 2014 में गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में 9,69,997 वोटरों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था. एक अनुमान के मुताबिक इस बार गिरिडीह लोकसभा में करीब पांच लाख महतो वोटर हैं. इस सीट पर तीन बार महतो जाति के सांसद रह चुके हैं. 1984 से कोशिश करते-करते स्व. विनोद बिहारी महतो को पहली सफलता 1991 में मिली. उनके स्वर्गवास के बाद 1992 में उनके बेटे राज किशोर महतो सांसद बने. तीसरी बार 2004 में रवींद्र पांडे को पटखनी देकर टेकलाल महतो सांसद बने और इस बार माना जा रहा है कि निश्चित तौर पर कोई महतो ही जीत दर्ज करेगा. इसके अलावा क्षेत्र में जो समीकरण बनता दिखाई दे रहा है, उससे कहा जा सकता है कि मांझी और मुस्लिम और पिछड़ी जाति के वोट जगरनाथ महतो के खाते में जाने की उम्मीद है.

इसे भी पढ़ें – आइसीएसई रिजल्टः दसवीं में संत फ्रांसिस जसीडीह के सार्थक सिंह, बारहवीं में डिनोबिली धनबाद के आकाश अग्रवाल टॉपर

adv

जानिए पिछले लोकसभा चुनाव का हाल

बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे रवींद्र कुमार पांडेय को 3,91,913 वोट आये थे. दूसरे नंबर पर 3,51,600 वोट लाकर जगरनाथ दूसरे नंबर पर थे. जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़ रहे डॉ सबा अहमद 57,380 और आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुदेश महतो के ससुर यूसी मेहता 55,531 वोट लाकर तीसरे और चौथे स्थान पर थे. वहीं जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जलेश्वर महतो 40,010 वोट लाकर पांचवें स्थान पर थे. इस बार बीजेपी को आजूस का साथ मिल रहा है. वहीं जदयू भी एनडीए फोल्डर में है. जिसका फायदा चंद्रप्रकाश चौधरी को होता दिख रहा है. रवींद्र पांडे यहां से 1996, 1998, 1999, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनाव जीत चुके हैं.

इसे भी पढ़ें – ICSE का परिणाम निकला: रचा इतिहास 12वीं में देवांग और विभा ने लाये 100 फीसदी नंबर  

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: