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कृषि के विकास में झारखंड को पुरस्कार मिलना ठीक, लेकिन धान की पैदावार का मूल्यांकन भी जरूरी : सरयू राय

  • मंत्री ने कहा- कृषि विभाग से सभी जिलों में धान उत्पादन की स्थिति पर रिपोर्ट मंगाकर करें आकलन
  • आंकड़ों के आधार पर ही न्यूनतम समर्थन मूल्य होगा तय

Ranchi : खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने विभागीय सचिव से सभी जिलों में धान की पैदावार का आकलन करने को कहा है. उन्होंने कृषि और सहकारिता विभाग से जिलावार धान उत्पादन का आंकड़ा मंगाने का निर्देश दिया है. राय ने कहा है कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए झारखंड को पुरस्कार मिलना अच्छा है, पर धान की पैदावार का मूल्यांकन भी जरूरी है. इसी आधार पर यह तय हो पायेगा कि किस-किस जिले में पैदावार की स्थिति क्या है और धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या होगा. न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने पर ही सरकार अपने स्तर से धान की खरीद करेगी.

विसंगति का कारण जानना विभाग के लिए जरूरी

सरयू राय ने कहा कि 2016-17 में धान का उत्पादन 48 लाख मीट्रिक टन से अधिक है, पर धान का समर्थन मूल्य सरकार की ओर से केवल दो लाख टन और 2.25 लाख मीट्रिक टन के लिए ही तय किया गया है. ये आंकड़े धान उत्पादन और तय न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर काफी कम हैं. इस विसंगति का कारण जानना विभाग के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा है कि कृषि विभाग के जिस तंत्र ने धान के उत्पादन में वृद्धि हासिल करने में सफलता हासिल की है, उस तंत्र की सेवा धान की खरीद के लिए भी उपयोग में लायी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषि सचिव से यह आग्रह किया जाये कि वह कृषि मित्रों, सहकारिता संस्थानों और अन्य की सहायता धान की खरीद के लिए विभाग को उपलब्ध करायें. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने धान का न्यूनतम खरीद मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. विभाग ने किसानों को दो सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का प्रस्ताव दिया है. बाजार में धान का मूल्य इससे काफी कम है. किसानों को सरकारी खरीद केंद्र तक लाने के लिए प्रेरित करने के लिए भी प्रयास होना जरूरी है. कृषि विभाग के कृषि मित्र और अन्य सहयोगी तंत्रों को इसमें जोड़ने की आवश्यकता है. इससे किसानों को उनके उत्पादन का लाभ मिल सकेगा.

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