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राज्य की धरोहर के संरक्षण के लिए जियो टैगिंग की आवश्यकता : कुलपति

Hazaribagh : विनोबाभावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में गुरुवार को मानवशास्त्र व इतिहास विभाग की ओर से आर्यभट्ट सभागार में झारखंड की धरोहर विषयक संगोष्ठी हुई. इसका उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि विभावि के वीसी प्रो. डा. मुकुल नारायण देव ने कहा कि संगोष्ठी से छात्रों एवं शोध कार्य में लगे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलता है. उन्हें विश्वविद्यालय में शोध को सभी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होता है. इस तरह की संगोष्ठी एक दिन के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक माह आयोजित हो. साथ ही संगोष्ठी के आयोजन में अन्य विषयों को भी साथ मिलकर विद्यार्थियों को जागरूक करने एवं शोधार्थियों को दिशानिर्देश करने का काम करना चाहिए.

प्रति कुलपति प्रो. डा. अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि धरोहर के संरक्षण के लिए जियो टैगिंग की आवश्यकता है. धरोहरों का मानचित्रण एवं दस्तावेजीकरण होना चाहिए.

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प्रति कुलपति ने शैल चित्र एवं बौद्ध कालीन मूर्तियों के अलावे जनजाति संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कार्य करने के लिए सभी विभाग से आह्वान किया.

संगोष्ठी में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ पीसी देवधरिय, रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुमन, भूगर्भ शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ एचएन सिन्हा, डॉ प्रणिता के अलावा कई विभाग के शोध छात्र-छात्राएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे. संगोष्ठी में स्थानीय धरोहरों के संरक्षण से लेकर झारखंड की अन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए युवाओं से आगे आने की अपील की गई.

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इस संगोष्ठी में मानव विज्ञान विभाग एवं इतिहास विभाग के 98 छात्र-छात्राओं के अलावा कई शोध छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. वक्ता के रूप में इतिहास विभाग के शोध छात्र उदेश कुमार, इतिहास विभाग के शिक्षक डॉक्टर विकास, डॉ चंद्रशेखर तथा विभागाध्यक्ष डॉ अशोक मंडल थे.

धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना की कोऑर्डिनेटर डॉक्टर जॉनी रूफिना तिर्की ने किया. विषय प्रवेश में डॉ गंगानाथ झा ने झारखंड की धरोहर, शैल चित्र एवं बौद्ध कालीन मूर्तियों का मानव वैज्ञानिक एवं ऐतिहासिक महत्त्व बताया. अंत में डॉ हितेंद्र अनुपम ने भी झारखंड के धरोहर पर विशेष प्रकाश डाला.

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