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फरवरी में आ जाएगी जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन, वैरिएंट पता करने के लिए सैंपल नहीं भेजना होगा बाहर

Vivek sharma

Ranchi : कोरोना का कहर रांची समेत सभी जिलों में जारी है. वहीं झारखंड में 14 लोगों में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन की पुष्टि हो चुकी है. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग गंभीर हो गया है. वहीं कोरोना वायरस के वैरिएंट का पता लगाने वाली जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन का आर्डर कर दिया गया है. फरवरी के दूसरे हफ्ते तक यह मशीन रांची में इंस्टाल हो जाएगी.

वहीं ट्रायल के बाद सैंपल की टेस्टिंग का काम भी शुरू कर दिया जाएगा. इसके बाद कोरोना वायरस का वैरिएंट पता लगाने के लिए दूसरे राज्यों में सैंपल भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बताते चलें कि झारखंड में कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट और वैरिएंट आफ कंसर्न ने अधिकारियों की नींद उड़ाकर रखी है. ऐसे में एनएचएम के अधिकारियों ने कंपनी को कोरोना की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द मशीन सप्लाई करने की मांग की है.

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5-6 घंटे में मिल जाएगी सैंपल रिपोर्ट

सैंपल भेजने के 15 से 20 दिनों बाद उसे प्रोसेस कर जांच की जाती है. इससे रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है. ऐसे में जब जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन इंस्टाल हो जाएगी तो रिपोर्ट आने में 5-6 घंटे से ज्यादा का समय नहीं लगेगा. इससे संबंधित वैरिएंट का प्रसार रोकने में मदद मिलेगी. वहीं कांटैक्ट ट्रेसिंग से नए म्यूटेंट के प्रसार को बढ़ने से रोकने में आसानी होगी.

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वायरस का बायोडाटा बताएगी जिनोम सीक्वेंसिंग

जिनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है. कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जिनोम से मिलती है. स्ट्रेन की पहचान के बाद पता लगाया जा सकता है कि यह किसी दूसरे राज्य व देश का स्ट्रेन है या नया म्यूटेंट या वायरस है. इसी का पता लगाने के लिए सिक्वेंसर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है. अब मशीन लग जाने से वायरस का बायोडाटा भी पता चल जाएगा.

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अभी आइएलएस भुवनेश्वर भेजे जाते रहे है सैंपल

2020 के मार्च में कोरोना ने दस्तक दी थी. इसके बाद से लगातार मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है. इन दो वर्षों में आइसीएमआर की गाइडलाइन के तहत रिम्स से हर महीने रैंडम सैंपल आइएलएस भुवनेश्वर भेजा जाता रहा है. जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमितों में कौन सा वैरिएंट एक्टिव है. इस चक्कर में 20 दिन तक का समय लग जाता है. वहीं रिपोर्ट आने तक मरीजों की परेशानी भी बढ़ जा रही है. इतना ही नहीं संक्रमित व्यक्ति रिपोर्ट आने तक कई लोगों के संपर्क में आ चुका होता है. जिससे कि संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है.

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रिम्स में मशीन लगाने का सुझाव

आइसीएमआर की एक्सपर्ट्स की टीम दिसंबर में झारखंड दौरे पर आई थी. इस दौरान टीम ने रिम्स का निरीक्षण करने के साथ ही डॉक्टरों व अधिकारियों से कोरोना के मद्देनजर चर्चा की थी. टीम ने कहा था कि रिम्स में अब तक जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन का नहीं लग पाना दुर्भाग्य है. सैंपल बाहर भेजने से रिपोर्ट के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. साथ ही टीम ने कहा था कि रिम्स में जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन लगाने के लिए माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती, चूंकि कोरोना का पता लगाने के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट भी वहीं पर किया जा रहा है.

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हाईकोर्ट ने भी लगाई थी फटकार

कोरोना जांच के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन की खरीद पर राज्य सरकार के जवाब पर झारखंड हाईकोर्ट ने इसी महीने सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि झारखंड में कोरोना की तीसरी लहर लगभग आ चुकी है अब सरकार किस आस में बैठी हुई है? जब लोग मरने लगेंगे तब मशीन की खरीद की जाएगी. साथ ही 2 सप्ताह का समय देते हुए मशीन खरीदकर लगाने और कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया था.

एनएचएम प्रोक्योरमेंट सेल के नोडल डॉ अनिल कुमार ने बताया कि मशीन का आर्डर कर दिया गया है. 45 दिनों के अंदर मशीन की सप्लाई की जानी है. फिर भी हमने लोगों की सुरक्षा और कोरोना की गंभीरता को देखते हुए कंपनी से जल्दी सप्लाई करने को कहा है. जिससे कि टेस्टिंग शुरू की जा सके.

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