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सवर्ण आरक्षणः लोकसभा में आज पेश होगा संविधान संशोधन बिल

विपक्ष ने बताया ‘जुमला’,सरकार बोली ऐतिहासिक कदम

2,014

New Delhi: लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने आर्थिक रुप से पिछड़ी सवर्ण जातियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है. मोदी कैबिनेट के इस फैसले को सरकार जहां ऐतिहासिक कदम बता रही है. वहीं विपक्ष ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया है. इन सबके बीच बिल की संवैधानिक मंजूरी के लिए आज संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया जाएगा.

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हालांकि, संसद का मौजूदा शीतकालीन आज तक चलना था. सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा की कार्यवाही को एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है. ताकि संविधान संशोधन विधेयक को चर्चा के बाद मंजूरी दिलाई जा सके. वहीं  बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा है. जबकि कांग्रेस ने पहले ही अपने सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था.

बिल पास कराना बड़ी चुनौती

संसद का शीतकालीन सत्र जिस तरह से राफेल डील को लेकर हंगामेदार रहा है. ऊपर से आज सत्र का आखिरी दिन है, ऐसे में सरकार के सामने इस बिल को पेश करने और पास करवाना किसी चुनौती से कम नहीं. सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार इस बिल को पास कराने के लिए सत्र को आगे बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है.

हालांकि, सरकार के पास लोकसभा में तो बहुमत के आंकड़े हैं. ऐसे में निचली सदन में संविधान संशोधन विधेयक पास कराना आसान होगा, लेकिन राज्यसभा में सरकार के पास संख्या बल नहीं है. ऐसे में सरकार की अग्निपरीक्षा होना तय है.

लंबे समय से थी मांग

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बीजेपी का वोट बैंक मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की ये लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को आरक्षण दिया जाए. माना जा रहा है कि सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत आज संसद में विधेयक पेश कर सकते हैं.

प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा. इसका मतलब है कि आर्थिक रूप से कमजोर  तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगा.

विपक्ष ने बताया ‘जुमला’

हालांकि मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण बिल पर विपक्ष हां और ना के बीच फंसी है. लेकिन विपक्षी पार्टियां इसे महज जुमला बता रही हैं. विपक्ष के नेताओं ने इसे आम चुनाव से पहले का चुनावी स्टंट करार दिया है. हालांकि, सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए विपक्षी पार्टियों ने फिलहाल सरकार के इस कदम का समर्थन किया है.

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