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सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा से भी पास

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New Delhi: सवर्ण आरक्षण बिल और संविधान संशोधन प्रस्ताव लोकसभा के साथ-साथ अब राज्यसभा में भी पास हो गया है. अब यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा. उसके बाद 8 लाख सलाना आय वाले सवर्णों को सरकारी नौकिरयों और शिक्षा में 10 प्रतिशत का आरक्षण मिलेगा.

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राज्यसभा में आरक्षण बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई लेकिन यह प्रस्ताव खारिज हो गया. बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के समर्थन में 18 वोट पड़े जबकि इस प्रस्ताव के खिलाफ 155 सांसदों ने वोट किया. सदन में कुल 174 सांसद मौजूद हैं.

पहले बिल लाते तब भी अवसरवादी ही कहलाते मोदी: अमर सिंह

राज्यसभा में निर्दलीय सांसद अमर सिंह ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग बिल का विरोध कर रहे हैं वो वोट क्यों दे रहे हैं. अगर यह बिल इतना ही गंदा है तो वोट न दें. उन्होंने कहा कि सवर्णों ने बहुत पहले से ही अपना मन बदल लिया है, दलित से रिश्ते कायम किये, रोटी-बेटी के संबंध बनाये. उन्होंने कहा कि गरीब सवर्णों के आरक्षण के सवाल पर देश, काल और परिस्थिति की बात हो रही है. अगर मोदीजी तीन राज्यों के चुनाव से पहले बिल लाते तो उन्हें अवसरवादी कहा जाता, अब ला रहे हैं तो भी आपत्ति हो रही है.

चुनाव की वजह से लाया गया बिल: अठावले

राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कविता पढ़ते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने सवर्णों को आरक्षण देने की हिम्मत दिखायी है, इसलिए 2019 में उनकी खिदमत बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 70 साल तक सवर्णों को धोखा दिया है और मेरे पास नरेंद्र मोदी से दोस्ती करने की कला है, इसलिए कांग्रेस छोड़कर मैं बीजेपी की तरफ चला. सवर्णों को आरक्षण देकर मोदीजी ने मारा है छक्का, 2019 में विजय है उनका पक्का. मोदीजी और शाहजी मुझे दे देंगे थोड़ा धक्का तो मैं कांग्रेस के खिलाफ मार पाऊंगा छक्का. अठावले ने कहा कि हमेशा से मैं सवर्णों को आरक्षण की मांग करता आया हूं और चुनाव नजदीक आ गया है तो बिल लाने की जरूरत है.

दलितों का आरक्षण खत्म करेगी सरकार: संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि इस बिल के तहत सरकार ने गरीब सवर्णों को धोखा देने का काम किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजधानी में बैठने वाले लोग दलित विरोधी हैं और वहीं से इस बिल का दस्तावेज आया है. नागपुर के प्रमुख यह बोल चुके हैं कि आरक्षण खत्म होना चाहिए और दलितों को आरक्षण को खत्म करने की मंशा के साथ यह बिल लाया गया है. नागपुर में एक भी प्रमुख दलित और पिछड़े वर्ग से नहीं बैठा है, यह इनकी नियत है. उन्होंने सभी दलों से इस बिल को सदन से पारित नहीं होने देने की अपील की.

निजी क्षेत्र में आरक्षण दे सरकार: डी राजा

सीपीआई सांसद डी राजा ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान सभा की चर्चा के खिलाफ है. मूछ बढ़ाने पर गुजरात में दलित युवक की लिंचिंग की जाती है, यह किस प्रकार का भारत हम बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि संविधान में सामाजिक पिछड़ेपन के लिए आरक्षण का प्रावधान है, कही भी आर्थिक आधार पर आरक्षण का जिक्र नहीं है. राजा ने कहा कि आप हर बिजनेस हाउस को सपोर्ट करते हैं अगर हिम्मत है तो प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का बिल लेकर आएं, हम उसका समर्थन करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि वामपंथियों ने हमेशा से गरीबों की लड़ाई लड़ी है और हम ही समाज में बराबरी, सामाजिक न्याय के लिए सड़कों पर उतरे हैं.

महिला आरक्षण पर सरकार क्यों नहीं सोच रही: कुमारी शैलजा

कांग्रेस की सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि जब देश की जनता आपसे दूर जा रही है तब आप आखिरी सत्र के आखिरी दिन यह बिल लेकर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यह बिल टिक नहीं पाएगा क्योंकि आपके पास कई सवालों का जवाब नहीं है, आप लोगों को गुमराह कर रहे हैं. कांग्रेस सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण के बारे में सरकार क्यों नहीं सोच रही है. वोट लेने के लिए यह बिल तो ला रही है लेकिन महिलाओं के बारे में सरकार कब सोचेगी.

एनसीपी बिल का समर्थन करेगी

एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मुझे तो टीवी से पता चला कि सरकार संविधान में संशोधन करने जा रही है. उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में यह फैसला लिया गया है और चुनाव के बाद इसका असर सामने आने वाला है. पटेल ने कहा कि सामाजिक न्याय के सवाल पर सबकी राय एक ही है. उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में बिल लाने की बजाय हम सबके साथ चर्चा करके, स्टैंडिंग कमेटी में बिल को भेजते तो कुछ मुद्दों का समाधान जरूर मिल जाता. उन्होंने कहा कि जब नौकरी नहीं होगी तो आरक्षण देने का फायदा क्या होगा. पटेल ने कहा कि हमारी पार्टी बिल का समर्थन जरूर कर रही है लेकिन हमारी सुझावों पर सरकार जरूर करेगी.

बाउंड्री पार नहीं करेगा ये छक्का: सतीश मिश्रा

बीएसपी सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हमारी नेता बहम मायावती सदन के भीतर उच्च जातियों के गरीबों को आरक्षण का समर्थन कर चुकीं हैं. हमारी पार्टी भी आज इस बिल का समर्थन कर रही है. मिश्रा ने कहा कि अगर आप संविधान में आर्थिक आरक्षण के लिए संशोधन ला रहे हैं तो जातिगत आरक्षण के लिए भी 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण लेकर आइये. उन्होंने कहा कि आप क्यों, कैसे और किन परिस्थितियों में बिल ला रहे हैं, इस पर तो सवाल पूछे ही जाएंगे. सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण के लिए क्या 4 साल में क्या किया है. मंत्री बताएं कि आबादी के हिसाब से पिछड़ों का आरक्षण कब से बढ़ा रहे हैं. मिश्रा ने कहा कि आपने आखिरी बॉल पर छक्क जरूर मारा है लेकिन वो बाउंड्री के पार नहीं जाना वाला है.

बिना डाटा और रिपोर्ट के लाये बिल: सिब्बल

कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने बिल पर बोलते हुए कहा कि संविधान बदलने जा रहे हैं. लेकिन सरकार तब भी इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि सरकार के पास 5 साल थे, लेकिन क्यों जल्दी की जा रही है नहीं मालूम. सिब्बल ने कहा कि क्या बिल लाने से पहले सरकार ने कोई डाटा तैयार किया गया है. बिना किसी डाटा और रिपोर्ट के आप संविधान संशोधन करने जा रहे हो. एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इऩकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी ओर आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं. आप इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख कर दीजिए.

कपिल सिब्बल ने कहा कि जितनी नौकरियां पैदा नहीं हुई उससे कई ज्यादा नौकरियां चली गयीं हैं. प्राइवेट और सरकारी दोनों ही क्षेत्र में नौकरियों की संख्या घटी है. देश का युवा आज नौकरी के लिए तरस रहा है और वो मौके उसे सिर्फ देश का विकास होने पर मिलेंगे. देश से निवेश लगातार जा रहा है, आप किसी मूर्ख बना रहे हैं. जनता के चेहरे पर रौनक लाने का यह रास्ता नहीं है और जबतक जनता के चेहरे पर रौनक नहीं आएगी तब तक आपके चेहरे पर भी रौनक नहीं आ सकती.

अभी लेंगेगे और भी छक्के: रविशंकर

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले कांग्रेस ने क्यों अगड़ी जातियों को आरक्षण नहीं दिया, अब हम दे रहे हैं तो आप सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह संविधान के मौलिक अधिकार में परिवर्तन है और यह केंद्र ही नहीं बल्कि राज्य सरकार की नौकरी में भी लागू होता है. उन्होंने कहा कि समर्थन करना है तो खुलकर करिए. प्रसाद ने कहा कि आज संसद इतिहास बना रही है और हम सब यहां बैठकर बड़ा बदलाव ला रहे हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में हिम्मत है कि वो गरीबों के हर वर्ग की चिंता करती है. बिल देरी से लाने के आरोपों पर कानून मंत्री ने कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है और यह पहला छक्का नहीं है अभी विकास और बदलाव के लिए अन्य छक्के भी आने वाले हैं.

RJD ने किया बिल का विरोध, कहा- जातियों में ही है गरीबी

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि इस बिल का हमारी पार्टी विरोध करती है. हम सामाजिक न्याय वाले दल हैं और हमारे नेता ने हमेशा इसके लिए लड़ाई लड़ी है. उन्होंने कहा कि सरकार इस बिल को लाकर संविधान के बुनियादी ढांचे के साथ छेड़छाड़ कर रही है. झा ने कहा कि हमें सरकार की नीति और नियत दोनों पर एतराज है. उन्होंने कहा कि हम इस मध्य रात्रि की लूट पर मुहर नहीं लगा सकते. गरीबी की जाति नहीं होती, यह फिल्मी डायलॉग है क्योंकि जातियों में ही गरीबी है. ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्सिमों में 90 फीसदी लोग गरीब मिलेंगे.

बिल के खिलाफ सीपीएम

सीपीएम के सांसद इलामारन करीम ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि बिल की टाइमिंग से साफ है कि बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव में इसका फायदा उठाना चाहती है. सरकार की गलत नीतियों की वजह से नौकरियां बढ़ीं नहीं बल्कि घट गयी हैं, नोटबंदी के बाद भी रोजगार पर बुरा असर पड़ा है. बीजेपी की सरकार में सिर्फ कारोबारियों का विकास हुआ, आम लोगों के जीवन में कोई प्रभावी बदलाव नहीं आ पाया है. यह बिल किसी भी मकसद को पूरा नहीं कर पाएगा और न ही कोर्ट में टिक पाएगा. सरकार भी यह बात जानती है और आगामी चुनाव में जनता आपको संसद से बार निकाल देगी.

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TRS ने किया बिल का समर्थन

टीआरएस सांसद प्रकाश बांडा ने अपनी पार्टी की ओर से बिल का समर्थन करते हुए कहा कि पहली बार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण से जुड़ा बिल भी पारित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी का आरक्षण भी उनकी आबादी के अनुपात में बढ़ाना चाहिए. टीआरएस सांसद ने कहा कि आरक्षण नीति को और प्रभावी बनाने की जरूरत है ताकि समाज की जरूरतों के मुताबित इसे ढाला जा सके.

टीडीपी ने दिया बिल का साथ

टीडीपी के सांसद वाई एस चौधरी ने कहा कि यह बिल अच्छा है. लेकिन, अंतिम वक्त में क्यों लाया गया. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है, लेकिन इसे बहुत पहले लाना चाहिए था. टीडीपी सांसद ने कहा कि बिल के लिए संसदीय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ की गयी है और जल्दबाजी में यह बिल लाया गया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह बिल मददगार साबित होगा. इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए था.

जेडीयू ने किया बिल का स्वागत

जेडीयू सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मेरी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि अगड़ी जातियों के आरक्षण का श्रेय इस सरकार को जाता है और इसके लिए नरेंद्र मोदी जी को बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि आज के इस फैसला का भविष्य में अच्छा नतीजा आने वाला है क्योंकि यह सिर्फ नौकरियों की नहीं बल्कि सोच की बात है. इसके जरिए अगड़ों की भीतर पनप रही सोच को बदलने का काम होगा और पहली बार यूनिवर्सल आरक्षण लाया जा रहा है. यादव ने कहा कि इस बिल में दम है क्योंकि संविधान संशोधन से यह लाया जा रहा है और यह कोर्ट में टिका रहेगा.

बिल के समर्थन में BJD

बीजेडी सांसद प्रसन्न आचार्य ने कहा कि सरकार को आखिरी दिन में आईसीयू की जरूरत पड़ गयी है और यह बीमारू सरकार हो गयी है. जिसके लिए यह बिल ऑक्सीजन, अस्पताल और एंबुलेंस का काम करने वाला है. उन्होंने कहा कि तीन तलाक बिल लाने पर सरकार को कोर्ट के फैसले की याद आयी, लेकिन सबरीमाला में क्या हो गया. आचार्य ने कहा कि बिल को लाने में हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए, कोई इसका विरोध नहीं कर रहा है, हमारी पार्टी इस बिल का पुरजोर समर्थन करती है.

सवर्ण आरक्षण बिल धोखा है: डेरेक ओब्रायन

राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पर बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि यह बिल जनता के साथ धोखा है. उन्होंने कहा कि सदन में 14 बिल पेश किए गए लेकिन सिर्फ 1 बिल स्क्रूटनी के लिए भेजा गया है. ओब्रायन ने कहा कि क्या यह सदन ऐसे ही चलेगा. उन्होंने कहा कि सरकार संसद का अपमान कर रही है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि मोदी सरकार यह बिल इस लिए लाई है, क्योंकि वह अपने कार्यकाल में युवाओं को नौकरी देने में नाकाम रही है.

एआईएडीएमके ने सवर्ण आरक्षण बिल का विरोध किया

एआईएडीएमके ने सवर्ण आरक्षण बिल का विरोध किया है. एआईएडीएमके के सांसद ए. नवनीत कृष्णन ने कहा कि तमिलनाडु को इस बिल से सबसे ज्यादा नुकसान होगा. एआईएडीएमके सांसद ने कहा कि संसद के कॉन्स्टिट्यूशनल असेंबली नहीं है और न ही इसे पास ऐसी ताकत है, ऐसा मैं नहीं कह रहा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है. नवनीत कृष्णन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से भी स्पष्ट है कि संसद या कोई भी कानून संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदल सकती है.

कोर्ट में रद्द हो सकता है सवर्ण आरक्षण: रामगोपाल यादव

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि सवर्ण आरक्षण को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी आरक्षण की इजाजत दी है, लेकिन अगर सवर्ण आरक्षण को मिला दिया जाए तो कुल आरक्षण करीब 60 फीसदी पहुंच जाएगा.

लोकसाभा चुनाव को ध्यान में रखकर मोदी सरकार सवर्ण आरक्षण बिल लेकर आई है: रामगोपाल यादव

सवर्ण आरक्षण बिल पर बोलते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि देश ऊंच और नीच की बात लोगों के अंदर घर कर गई है. उन्होंने कहा कि देश में ऊंच और नीच की भावना कम हुई है, लेकिन खत्म नहीं हुई है. रामगोपाल यादव ने कहा कि मूल ढांचे में बदलवा करने की जरूरत है, सिर्फ इस आरक्षण से काम नहीं चलने वाला नहीं है.

रामगोपाल यादव ने कहा कि मोदी सरकार लोकसाभा चुनाव को ध्यान में रखकर सवर्ण आरक्षण बिल लेकर आई है.

राजनीति से प्रेरित है सवर्ण आरक्षण बिल: आनंद शर्मा

आनंद शर्मा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोरों के लिए आरक्षण की बात यूपीए सरकार के दौरान भी हुई थी. उन्होंने मोदी सरकार से पूछा कि 4 साल 7 महीने बाद इस बिल की क्यों याद आई.

कांग्रेस सांसद ने कहा, “सच यह है कि 3 राज्यों ने बीजेपी को आशीर्वाद देकर भेजा है, क्रिकेट सीरीज इंडिया ने जीती लेकिन आप 5-0 से चुनाव हार गए. राज्यों ने छोटा संदेश दिया है, बड़ा संदेश भी कुछ महीनों बाद मिलेगा.”

राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण बिल पर चर्चा जारी है. कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा, “पहले कुछ नहीं हुआ, सब अभी हो रहा है, यह कहना गलत है. पहले कुछ नहीं हुआ तो आप क्या लेकर आए थे. देश के लोगों से 2014 में बीजेपी ने कई वादे किए गए थे, हर चढ़ाई के बाद एक गहरी खाई भी आती है. देश की सभी पोशाकों का प्रदर्शन मोदी जी घूम-घूमकर कर रहे हैं, लेकिन सदन में ऐसे दर्शन नहीं होते हैं.”

आनंद शर्मा ने कहा कि संविधान के अंदर पिछड़ों को आरक्षण का प्रावधान पहले से ही रखा गया था और उसी के तहत अब तक आरक्षण चल रहा था. उन्होंने कहा कि देश में नौकरिया नहीं हैं. बीते साल 2018 में एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने नौकरियां खोद दीं, अब मोदी सरकार सवर्ण आरक्षण के जरिए जनता को सपना दिखा रही है.

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