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बोले जनरल रावत, सिर्फ नौकरी चाहिए तो रेलवे में जायें या बिजनेस चलायें, सेना नौकरी का जरिया नहीं

जनरल रावत का कहना था कि अक्सर देखा गया है कि युवा भारतीय सेना को रोजगार का जरिया मानते हैं. महज नौकरी हासिल करने का जरिया.

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 NewDelhi : सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नौजवानों से कहा है कि सेना नौकरी का जरिया नहीं है. वे गुरुवार को पुणे में बोल रहे थे. अपने बेबाक विचारों के लिए जाने जाने वाले सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना को नौकरी प्रदाता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. जनरल रावत का कहना था कि अक्सर देखा गया है कि युवा भारतीय सेना को रोजगार का जरिया मानते हैं. महज नौकरी हासिल करने का जरिया. इस क्रम में जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कई लोग, नौजवान मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि मुझे सेना में नौकरी चाहिए. तो मेरा उनसे कहना होता है कि भारतीय सेना नौकरी का साधन नहीं है. आपको नौकरी लेनी है तो रेलवे में जायें या अपना बिजनेस चलाइए. उन्होंने कहा कि मैं लोगों के दिमाग से इस गलतफहमी को खत्म करना चाहता हूं. कहा कि सेना का मतलब रोजगार नहीं होता. अगर आप सेना ज्वाइन करना चाहते हैं तो आपको शारीरिक और मानसिक कठोरता दिखानी होगी. आपके भीतर कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता होनी चाहिए.

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जनरल बिपिन रावत साफगोई से अपने विचार रखते रहे हैं

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साथ ही जनरल रावत ने बीमारी या दिव्यांगता का बहाना कर ड्यूटी से बचने या लाभ प्राप्त करने वाले सेना के जवानों को चेतावनी भी दी. हालांकि उन्होंने ड्यूटी के दौरान वास्तव में दिव्यांग होने वाले पूर्व सैनिकों और सेवारत जवानों को सभी मदद देने का भरोसा दिया. बता दें कि पहले भी जनरल बिपिन रावत कई बार साफगोई से अपने विचार किसी भी विषय पर रखते रहे हैं. कुछ दिनों पूर्व पाकिस्तान को चेताते हुए उन्होंने कहा था कि अगर भारत के साथ मिलकर रहना है तो उसे धर्मनिरपेक्ष देश बनना होगा. जरनल रावत ने कहा था कि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश बना लिया है. अगर उन्हें भारत के साथ मिलकर रहना होगा, तो उन्हें धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के तौर पर विकसित होना होगा. हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं. यदि वे हमारी तरह धर्मनिरपेक्ष बनना चाहते हैं. साथ ही कहा था कि   आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.

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