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जनरल कैटिगरी आरक्षण बिल राज्यों की विधानसभाओं से पास कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी : सुभाष कश्यप

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NewDelhi : जनरल कैटिगरी के गरीबों को 10 पर्सेंट आरक्षण के प्रावधान वाला संविधान संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो गया है. इसे अब देश के आधे राज्यों की विधानसभाओं से पास कराने की जरूरत नहीं है. यह बात केंद्र सरकार ने कही है. हालांकि कुछ विपक्षी सदस्यों ने इस पर सवाल उठाये हैं. लेकिन संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार संविधान में ऐसी व्यवस्था है कि इस तरह के बिल, जिसमें राज्यों के अधिकार क्षेत्र का हनन नहीं होता या उनके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं होता, उन्हें राज्यों की विधानसभाओं से पास कराने की जरूरत नहीं होतीबिल पर बहस के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आदि दलों ने इस विधेयक को पेश करने के समय पर सवाल उठाया और इसे राजनीति से प्रेरित कदम करार दिया. लेकिन सरकार के मंत्रियों ने सभी आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया.

सामान्य वर्ग का 10 पर्सेंट आरक्षण केंद्र व राज्य की सरकारी नौकरियों पर लागू

राज्यसभा में बिल पर बहस के दौरान कुछ विपक्षी दलों के विरोध पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनरल कैटिगरी के गरीबों को 10 पर्सेंट आरक्षण केंद्र और राज्य दोनों तरह की सरकारी नौकरियों पर लागू होगा. साथ ही कहा कि राज्यों को अधिकार होगा कि वे इस आरक्षण के लिए अपना आर्थिक क्राइटेरिया तय कर सकें.  इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए प्रसाद ने कहा कि यह मोदी सरकार का मैच जिताने वाला छक्का हैअभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे.  विधेयक के कोर्ट की परीक्षा में ठहर न पाने की आशंकाओं को खारिज करते हुए रविशंकर ने कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगाई गयी है. बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण का बिल बुधवार को राज्यसभा से भी पास हो गया.  इसके पक्ष में 165 और विरोध में 7 वोट पड़े.  लोकसभा से ये एक दिन पहले ही पास हो चुका है.  अब राष्ट्रपति की मंजूरी से इसे लागू किया जा सकेगा;  सूत्रों के अनुसार, सरकार की योजना इससे जुड़ी गजट अधिसूचना जल्द जारी करने की है.

 

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