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जीडीपी वृद्धि दर 2019-20 की पहली तिमाही में पांच फीसदी रही , पिछले साल इसी अवधि में थी आठ प्रतिशत

NewDelhi : अप्रैल-जून 2019 के लिए भारत की वृद्धि दर पिछले साल की इसी अवधि के 8 प्रतिशत की तुलना में घटकर 5 प्रतिशत रह गयी है,  शुक्रवार को जारी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के नवीनतम आंकड़े यही कहते हैं. खबरों के अनुसार पिछली 25 तिमाहियों में सबसे कम वृद्धि दर का कारण विनिर्माण क्षेत्र में तेज गिरावट और कृषि उत्पादन में गिरावट है.

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जान लें कि पिछले सात सालों यह सबसे कम जीडीपी वृद्धि दर है. इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर इतनी कम थी. उस समय यह दर 4.9 फीसदी पर थी.

यह 20 तिमाहियों में सबसे कम वृद्धि दर थी

भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 अगस्त को अर्थव्यवस्था की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 5.8-6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया था. यह जून के 6.4-6.7 फीसदी के अनुमान से नीचे था. कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन के कारण 2018-19 के जनवरी-मार्च तिमाही में वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत तक फिसल गयी थी. यह 20 तिमाहियों में सबसे कम वृद्धि दर थी.  इसकी वजह से लगभग दो साल बाद विकास दर के मामले में भारत चीन से पीछे हो गया था.

नवीनता आंकड़ों के अनुसार इस समय भारत की विकास दर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-2 के समय 2013-14 के जनवरी-मार्च तिमाही के विकास दर 5.3 फीसदी से भी कम हो गयी है.

विकास दर में लगातार गिरावट

वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद यानी कि जीडीपी की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.2 प्रतिशत से कम थी. ये 2014-15 के बाद से जीडीपी की सबसे धीमी वृद्धि दर थी क्योंकि पिछली सबसे कम दर 2013-14 में 6.4 प्रतिशत थी.  2018-19 की दूसरी तिमाही से ही विकास दर में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही अप्रैल-जून के दौरान ये दर आठ फीसदी पर थी.

इसके बाद जुलाई-सितंबर में ये घटकर सात फीसदी पर आ गयी तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर में ये और घटकर 6.6 फीसदी पर आ गयी. वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही में भारी गिरावट हुई और जनवरी-मार्च में जीडीपी वृद्धि दर 5.8 फीसदी रही. वित्त वर्ष 2019-20 में भी गिरावट का सिलसिला जारी है.

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