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गवई बराज जीर्णोद्धार: टाइम था जून 2018 तक, अब पूरा होगा दिसंबर 2020 में

लोकसभा और विधानसभा में बनता रहा है चुनावी मुद्दा

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  • 2013 में आये फैलिन तूफान में ध्वस्त हो गया था बराज का फाटक
  • 130 करोड़ की लागत से चल रहा है फाटक के साथ नहर के जीर्णोद्धार का काम

Prakash Mishra

Bokaro : कैसे हो किसानों की आय दोगुणी, जब दो साल में पूर्ण होने वाली सिंचाई योजना की अवधि विस्तार होकर चार वर्ष हो जाये. सात वर्ष पूर्व 2013 में फैलिन तूफान ने गवई बराज को ध्वस्त कर दिया था, उसे उन दिनों सरकार मरम्मत कर किसानों के खेतों में पानी पहुंचा सकती थी, लेकिन योजना बनाने और उसे धरातल में उतारने में तीन वर्ष लग गये.

जिले के चास और चंदनकियारी प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई व्यवस्था मुहैया कराने के उद्देश्य से चास प्रखंड के पिण्ड्राजोरा स्थित गवई नदी पर चार दशक पूर्व बने बराज के मरम्मति का काम जून 2018 में ही पूर्ण हो जाना था, लेकिन अब योजना पूर्ण होने की अवधि को विस्तार करते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से दिसंबर 2020 तक का लक्ष्य रखा गया है.

हालांकि यह योजना अपने निर्माण काल से ही विभागीय लूट का शिकार होता रहा है. इस पर चास और चंदनकियारी में काफी राजनीति भी हुई है. लोकसभा और विधानसभा में चुनावी मुद्दा भी बनता रहा है.

इस बार भी योजना चुनावी मुद्दा बन सकता है. चास और चंदनकियारी के कई गांवों के किसानों की तस्वीर और तकदीर इस बराज की पानी बदल सकती थी, पानी के अभाव में इलाके के किसान खेती छोड़ चुके है. इस मौसम में कई किसान अपने खेतों में गेंहू के अलावे सब्जी आदि की उपज करते थे.

लेकिन पानी के अभाव में किसानों के खेत बेकार हो गये है. इस बार बारिश ने भी धोखा दे दिया, जिस कारण धान की उपज नहीं के बराबर हो सकी. बराज के बाये नहर का पानी चास के टुपरा गांव तक पहुंच जाता था, जिससे किसानों को काफी लाभ मिल जाता था, लेकिन फैलिन तूफान के बाद सात साल से नहर में पानी का दर्शन तक नहीं हुआ.

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130 करोड़ की लगात से जून 2018 में तैयार हो जाना था कैनाल और बराज

बराज से बायी ओर निकली कैनाल।

इसे विभागीय लापरवाही ही कहेंगे कि 130 करोड़ की योजना को जून 2018 में ही पूर्ण हो जाना था, लेकिन योजना अधर में लटक गयी. अब योजना के अवधि विस्तार करने पर विभाग विमर्श करने लगा है, ताकि किसी भी हाल में दिसंबर 2020 तक इसे तैयार किया जा सके और नजर के माध्यम से किसानों के खेत में पानी पहुंच सके.

जानकारों की माने तो योजना की प्रशासनिक स्वीकृति जून 2016 में हुई थी, लेकिन सिर्फ मुख्यमंत्री के शिलान्यास के इंतजार में योजना छह माह देर से दिसंबर 2016 में शुरू हुई. जिस कारण भी दो साल में योजना पूरा नहीं हो सकी और किसानों को अब फिर करीब ढाई साल पानी का इंतजार करना होगा.

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मुख्य कैनाल 43.5 किमी है लंबी, अभी 25 किमी ही हो पाया है मरम्मत

ऑन लाइन शिलान्यास पट।

जन संसाधन विभाग की ओर से 43.5 किमी लंबे वर्षों पुराने कच्चे कैनाल का पक्कीकरण किया जा रहा है, ताकि लक्ष्य के अनुसार इस बार पानी चंदनकियारी के सिमुलिया पंचायत तक पहुंचाया जा सके.

लेकिन योजना की गति इतनी धीमी है कि अभी तक मात्र 25 किमी ही कैनाल का पक्की करण हो सका है. इसके अलावे नौ वितरक कैनालों की भी मरम्मति होनी है, जो भी काफी लंबी है.

वहीं बराज के दायीं ओर से निकली करीब 11 किमी लंबी कैनाल भी अधूरी पड़ी हुई है. इसे विभागीय लापरवाही नहीं कहेंगे, तो क्या कहेंगे.

हाल में मुख्य अभियंता भी इस योजना का निरीक्षण करने पहुंचे थे, उन्होंने भी खामियों को दूर करने का निर्देश दिया है, उसके बाद से बराज के फाटक का डिजाईन भी विभाग की ओर से नये तरीके से किया जा रहा है.

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किसानों में है निराशा

पिण्ड्राजोरा गांव के किनारे होकर बने बाये कैनाल के किनारे कई खेतों में इस वक्त गेंहू के फसल लहलहाते थे, लेकिन सात वर्षों से गेंहू और सब्जी की उपज गांव के किसान अजीत महतो, रमेश चंद्र महतो, तरणी प्रमाणिक, भूषण महतो, दक्षिणेश्वर महतो, विष्णु चरण महतो, परिक्षित महतो, मधु महतो, हारु महतो, हरिपद महतो, सीताराम महतो आदि समेत कई लोग नहीं कर पा रहें है.

गांव के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संतोष महतो और बाटुल प्रमाणिक ने बताया कि जब नहर कच्ची थी और बराज ठीक था, उन दिनों पानी चास प्रखंड के पुंडरु गांव तक पहुंच जाता था. बराज से पुंडरु तक नहर के किनारे रहने वाले काफी किसान गेंहू और सब्जी की खेती कर लेते थे, लेकिन सात वर्षों में किसान बेरोजगार हो गये है, सिर्फ धान की खेती करते है, जबकि इस साल बारिश ने भी धोखा दिया. किसान इस बार लोकसभा चुनाव में इसे चुनावी मुद्दा बनाने की योजना में हैं.

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हर हाल में योजना 2020 दिसंबर तक होगी पूरी : कार्यपालक अभियंता

तेनुघाट बांध प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता श्याम किशोर प्रसाद सिंह ने न्यूज विंग को बताया कि हर हाल में विभाग के द्वारा दिसंबर 2020 तक योजना को पूर्ण कर दिया जायेगा.

नहर की मरम्मति करने में कई स्थानों में जमीन विवाद भी सामने आ रही है, जिसे हल किया जा रहा है. उसके बाद नहर को पूरा करते हुए बराज को भी मरम्मत किया जा रहा है. इसके साथ विभाग के वरीय अधिकारियों के निर्देश पर भी काम हो रहा है.

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