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झारखंड के गौरव “सिम्फर” को मिला सीएसआइआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार

Dhanbad: सीएसआइआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद के शैल उत्खनन अभियांत्रिकी अनुसंधान समूह को व्यवसाय विकास एवं प्रौद्योगिकी विपणन श्रेणी के अंतर्गत सीएसआइआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार 2018 के लिए चयनित किया गया है. संस्थान को 2 लाख रुपए का नकद, स्मृति-चिह्न और एक सम्मान पत्र दिया जायेगा. डॉ प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. मुरारी प्रसाद रॉय, डॉ सी स्वाम्लियाना, डॉ मोरे रामलुलु, डॉ हर्ष कुमार वर्मा और डॉ मदन मोहन सिंह इस टीम के मुख्य सदस्य हैं. शैल उत्खनन अभियांत्रिकी अनुसंधान समूह को खनन और सिविल अवसंरचना परियोजनाओं में वैज्ञानिक तथा तकनीकी इनपुट प्रदान करने व उत्कृष्ट योगदान करने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

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कई परियोजनाओं में दिया है अहम योगदान

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इस अनुसंधान समूह के पास अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और इसने 400 से अधिक खानों में खनिजों के सुरक्षित और कुशल समुपयोजन में अपना योगदान दिया है. इसके अतिरिक्त इस अनुसंधान समूह के कारण कई प्रमुख परियोजनाओं, जिसमें दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में मेट्रो परियोजनाएं, मेगा जलविद्युत परियोजनाएं, उत्तराखंड में टिहरी हाइड्रो परियोजना, गुजरात में सरदार-सरोवर परियोजना, मध्य प्रदेश में इंदिरा सागर परियोजना, हिमाचल प्रदेश में नथपा झकरी हाइड्रो परियोजना, कोंकण रेलवे परियोजना,उधमपुर-श्रीनगर-बरामुल्ला रेल लिंक एवं जम्मू-कश्मीर में चेनानी-नाशरी सुरंग परियोजना का समय पर समापन संभव हुआ है.

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वर्तमान में उक्त अनुसंधान समूह विभिन्न खनन और सिविल निर्माण परियोजनाओं के अलावा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा मुंबई मेट्रो रेल परियोजना की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड परियोजना में कार्यरत है. इस अनुसंधान समूह के तकनीकी आलंब ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को 400 मीटर की गहराई पर गहनतम लेड-जिंक ओपेन-पिट खदान का संचालन करने और साथ ही साथ ओपेन-पिट खान के नीचे 950 मीटर पर भूमिगत खनन पद्धतियों द्वारा खनिजों का समुपयोजन करने के लिए सक्षम बनाया है.

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