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गढ़वा : विधायक प्रतिनिधि ने किराया मांगने पर दुकान मालकिन को पीटा, रात भर चला हाईवोल्टेज ड्रामा

Garhwa : गढ़वा जिले में शनिवार की रात विधायक प्रतिनिधि मासूम खान द्वारा किराया मांगने पर दुकान मालकिन की पिटाई कर दी. जिसके बाद हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. रात भर हंगामे के बाद सुबह सुलह कराया गया. इसे लेकर पूरी रात गढ़वा मुख्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. सांप्रदायिक स्थिति बिगड़ने की भी संभावना बनी, लेकिन पुलिस की तत्परता से इसे कंट्रोल कर लिया गया.

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शनिवार की शाम 6 बजे से देर रात्रि 1 बजे तक चले इस विवाद में पटाक्षेप गढ़वा के एसडीपीओ के नेतृत्व में दोनों पक्षों से जुड़े समाज के सम्मानित लोगों की पहल पर सदर थाने में समझौता से हुआ.

सूत्रों के अनुसार समझौता वार्ता में विधायक प्रतिनिधि मासूम खान ने रविवार को जीपी प्लाजा में स्थित उस दुकान को खाली करने पर सहमति जता दी है, जिस दुकान को लेकर शनिवार को मारपीट हुई थी. समझौते के अनुसार 5 लाख पगड़ी बतौर मासूम खान द्वारा जमा की गई राशि जीपी प्लाजा की मालकिन अंजना नारायणपुर और इनके देवर छोटु केशरी द्वारा लौटा देने के बाद दुकान खाली हो जाएगी.

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हालांकि इस पूरे प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है, इसे मुकम्मल तौर पर फिलहाल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इस मामले में एक पेंच और फंस सकता है, वह यह कि छोटू केशरी तथा उनके भाई पूर्णेन्दु नारायण. दोनों भाइयों के बीच विधायक प्रतिनिधि मासूम खान ने ढाई-ढाई लाख रुपए पगड़ी की राशि जमा की थी. इसके साथ ही 12 हजार महीने के किराये पर दुकान ली थी.

सूत्र बताते हैं कि मारपीट की घटना के बाद बड़े भाई पूर्णेन्दु नारायण तो समझौता के अनुसार दुकान खाली कराने के लिए ढाई लाख रुपए पगड़ी की राशि लौटा देंगे. मगर दोनों भाइयों के बीच बेहतर संबंध नहीं होने के कारण छोटू केशरी इस समझौता के अनुसार दुकान खाली कराने के लिए पगड़ी की राशि तुरंत लौटा ही देंगे यह कोई जरूरी नहीं है.

छोटू केसरी दुकान को खाली कराने को इच्छुक नहीं है. ऐसे में पगड़ी की पूरी 500000 राशि कब तक लौटेगी? और जब लौटेगी, तभी दुकान खाली होगी, जैसे पूरे मामले पर संशय बरकरार है. क्योंकि फिलहाल छोटू केशरी जिला मुख्यालय गढ़वा में नहीं है.

दरअसल इसकी शुरुआत कल शाम 6 बजे उस समय हुई, जब जीपी प्लाजा की मालकिन अंजना नारायण किराया लेने पहुंची. इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ और विधायक प्रतिनिधि मासूम ने अनामिका और उनके पुत्र के साथ मारपीट कर दी. मारपीट के बाद वे लोग तत्काल गढ़वा सदर थाना प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचे. जिसके बाद मामले को लेकर भी काफी विवाद देखने को मिला. घटना को लेकर पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठे. माना जा रहा है कि पुलिस जान-बुझ कर मामले को रफा-दफा करना चाहती थी.

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रात्रि 8 बजे के करीब थाना परिसर में प्राथमिकी दर्ज कराने के मुद्दे को ले भारी हंगामा भी हुआ‌. हंगामा इतना हुआ कि पुलिस को दो -दो बार क्रमशः 9 से लेकर 9. 30 के बीच लाठी भी भांजनी पड़ी.

बाद में खबर मिलने पर पेयजल स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर की सीधे एंट्री रात्रि करीब 9.45 बजे तब हुई जब वे पीड़िता अंजना नारायण के घर मिलने पहुंचे. मंत्री के लौटते ही अनामिका अपने पुत्र व पति के साथ दुबारा थाना लगभग 10 बजे रात्रि पहुंची तथा दुबारा समझौता वार्ता रात्रि 1 बजे तक चली. डीएसपी के नेतृत्व में थाना प्रभारी के चेंबर में वार्ता हुई. इसमें समाज के दोनों पक्ष के प्रतिष्ठित लोग समझौता वार्ता कराने में जुटे. इसके बाद रात्रि 1 बजे उक्त मुद्दे पर सहमति बनी और दोनों पक्ष अपने-अपने घर लौट गए.

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