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गढ़वा : स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में नहीं बंटने से बड़ी मात्रा में दवाएं हुई एक्सपायर

 नाकामी को छुपाने के लिये अस्पताल प्रबंधन ने जमीन में कर दिया दफन

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Garhwa : झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने का हमेशा दंभ भरा जाता रहा है. लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है. मरीज इलाज के अभाव में परेशान रहते हैं और सरकार और स्वास्थ्यकर्मी कागजों पर हकीकत बयां कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं.

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ताजा मामला गढ़वा जिला से जुड़ा हुआ है. जिले के श्रीवंशीधर (नगर उंटारी) अनुमंडलीय अस्पताल में वितरण नहीं होने के कारण भारी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो गयी. इस पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से नाकामी छुपाने के लिए सारी दवाओं को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन कर दिया गया. यहां बताना जरूरी है कि गढ़वा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला है. अक्सर स्वास्थ्य विभाग की नाकामियों की वजह से यह जिला सुर्खियों में रहता है.

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बिना प्रक्रिया के ही बेच दिया गया पुराने सामान

श्रीवंशीधर अनुमंडलीय अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण अस्पताल में लाखों रुपये की भारी मात्रा में एक्सपायर हो चुकी जीवन रक्षक समेत कई अन्य दवाईयां जमीन में गाड़ दिये जाने का मामला उजागर हुआ है. एक्सपायर हो चुकी दवाईयों को जमीन में गाड़ने के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन के द्वारा बिना प्रक्रिया पूरा किये लाखों रुपये के पुराने सामानों यथा कुर्सी, टेबल, बेड, ग्रिल, गेट को भी कबाड़ा में बेच दिया गया है. यह सब गत मंगलवार को किया गया है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक्सपायर दवाईयों को पुराने अस्पताल परिसर में ही जेसीबी मशीन से गढ्ढा खोदकर उसमे गाड़ दिया गया है.

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मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं

यहां बताते चलें कि सरकार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ देने के लिये प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. मरीजों को दवाई के साथ-साथ उनके सेहत का भी ख्याल रख उन्हें भोजन तक दे रही है. आयुषमान भारत के तहत पांच लाख रुपये का मुफ्त में इलाज कराने की व्यवस्था की है, किन्तु अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. अस्पताल में रखी रखी जीवन रक्षक समेत कई आवश्यक दवाईयां एक्सपायर हो जा रही हैं.

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नकामी छुपाने के लिए किया गया काम

सबसे मजे की बात है कि अनुमंडलीय अस्पताल का भवन जर्जर होने के कारण डीसी के निर्देश पर अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर में संचालित किया जा रहा है. अब अस्पताल का भवन बनकर तैयार है. अस्पताल प्रबंधन के द्वारा अस्पताल को पुराने भवन में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है. लेकिन अस्पताल प्रबंधन अपनी नाकामी को छुपाने एवं अस्पताल शिफ्ट करने के बहाने आनन-फानन में बिना प्रक्रिया पूरा किये ही एक्सपायर दवाईयों को ट्रैक्टर से ढुलवाकर जमीन में गाड़ दिया है.

उधर, इस संबंध में पूछने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा बताया गया कि जमीन में डिस्पोजल की गयी एक्सपायरी दवाई 2011 में जब्त की गयी थी. 2015 में तीन सदस्यीय रद्दीकरण समिति के द्वारा उक्त एक्सपायर दवाईयों को डिस्पोजल करने का निर्णय लिया गया था. वहीं दवा को गढ्ढे में डालकर डिस्पोज किया गया है, जबकि गढ्ढे में वर्ष 2011, 12 एवं 13 में एक्सपायर हुई दवाओं का मिलना अस्पताल प्रबंधन के दावे की पोल खोलता है.

कौन-कौन सी दवा गाड़ी गयी

अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुराने अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में जीवन रक्षक समेत भारी मात्रा में लाखों रुपये की एक्सपायर दवाईयों को जमीन में गाड़ दिया गया है. जमीन में गाड़े गये दवाईयों में अल्बेंडाजोल, जो जनवरी 2012 में एक्सपायर हुई है. नोटी टी जेड जो फरवरी 2012 में एवं ऐंटीमलेरियल कॉबी ब्लीस्टर पैक, जो जनवरी 2012 में एक्सपायर समेत विभिन्न प्रकार की जीवन रक्षक एवं अन्य दवाईयों के नाम शामिल हैं.

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जांच कर होगी कड़ी कार्रवाई : एसडीओ

एसडीओ कमलेश्वर नारायण ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन के द्वारा एक्सपायरी दवा को गाड़ दिया जाना गंभीर मामला है. मामले की जांच कर दोषी के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

2011 के बाद डिस्पोज दवाएं गाड़ी गयी हैं तो इसकी जांच की जायेगी : डीएस

अनुमंडलीय अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक्सपायर दवाई को डिस्पोज किये जाने के संबंध में पूछने पर जिले के सीएस डॉ एन के रजक ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है. इस संबंध में डीएस से पूछा तो बताया गया कि 2015 में प्रक्रिया पूरा करने के बाद दवाओं को डिस्पोज किया गया है. यदि 2011 के बाद की एक्सपायरी दवाओं को भी डिस्पोज किया गया है तो इसकी जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.

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