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गढ़वा: हर दिन नदी पार कर वैक्सीनेशन के लिए जाती है एएनएम, प्रेरणा देने वाली है कहानी

Garhwa : देश में वैक्सीनेशन का दौर जारी है. देश के दूरदराज इलाकों में जाकर स्वास्थ्यकर्मी लोगों को वैक्सीन दे रहे हैं. कुछ ऐसे ही तस्वीर झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित सगमा प्रखंड के सोनडीहा गांव के मलिया नदी में देखने को मिली, जहां एएनएम अपने पति के साथ नदी पार कर वैक्सीनेशन के लिए जाती हैं. लोग वैक्सीन ले सके इसके लिए एएनएम नदी पार करती हैं.

जानकारी के मुताबिक सगमा प्रखंड मुख्यालय से करीब तीन किमी दूर सोनडीहा गांव में मलिया नदी पर आने जाने के रास्ते के बीच नदी में पुल नहीं होने से गांव दो भागों में बंट गया है. बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिये ले जाने के दौरान होती है. डोली में बांधकर मरीज को नदी पार करना पड़ता है.

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उसके बाद सबसे बड़ी समस्या बच्चों को स्कूल जाने में होता है. बारिश होने के बाद बच्चे स्कूल नहीं जाते जिससे उन लोगों की पढ़ाई बाधित होती है.

यह सिर्फ पहली मर्तबा नहीं है कि ऐसी तस्वीर सामने आई है. कुछ महीने पूर्व लातेहार जिले में भी ऐसी तस्वीर सामने आई थी.

जहां एक महिला अपने बच्चे को पीठ पर बांधकर नदी पार कर रही थी. महिला स्वास्थ्य उपकेंद्र से नदी पार करके दूसरे इलाके में जाकर टीकाकरण देने का काम करती हैं.

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गढ़वा की स्वास्थ्यकर्मी एएनएम नीलम सिन्हा ने बताया कि वह पिछले 1 वर्षों से रोजाना नदी पार करके टीकाकरण के लिए जाती हैं. उसने बताया कि जब नदी में पानी अत्यधिक हो जाता है तो किसी तरह से तैर कर भी टीकाकरण के लिए जाते हैं.

नीलिमा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोरोना वायरस से लोग बचे. इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगर मुझे जान भी देनी पड़े तो मैं कार्य करके लक्ष्य को पूरा करूंगी.

नीलम ने बताया कि मेरे तीन बच्चे हैं. सभी बाहर में पढ़ाई करते हैं. उसने बताया कि इस रास्ते के अलावा एक और रास्ता है 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा, लेकिन वहां पर भी बीच में नदी पार करना ही पड़ेगा.

वही एएनएम के पति ने बताया कि हम लोगों के द्वारा लगातार मांग की गयी कि किसी तरह से पुल बन जाए, ताकि मेरे साथ साथ यहां के लोगों को भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े, परंतु मांग धरी की का धरी है.

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आज तक कोई भी इस पर विचार नहीं कर रहा है. नीलमा के पति ने कहा कि मेरी पत्नी अकेले नदी पार करके टीकाकरण के लिए जाती थी, उसने मुझे यह व्यथा बताई. उसके बाद से मैं भी इसी के साथ सहयोग में आ गया, ताकि किसी भी तरह से टीकाकरण नहीं रुके. जिस तरह से हम नदी पार कर रहे हैं, उसी तरह से रोजाना आते जाते भी हैं.

गांव वालों ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो गयी तो स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचने के लिए खटिया के सहारे नदी पार होते हैं. अगर ज्यादा नदी में पानी रहा तो लोग नदी किनारे ही दम तोड़ देंगे. सबसे ज्यादा दिक्कत प्रसूता को होता है. किसी तरह से स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया जाता है.

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