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गढ़वा : बालू के अवैध खनन से धंसा पुल, एक दर्जन गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कटा

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Garhwa : जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत करकोमा एवं हासनदाग गांव के बीच बना पुल सोमवार की रात धंस गया. पुल के धंसने से वाहनों की आवाजाही पर खतरा उत्पन्न हो गया है. ग्रामीणों में इससे जहां भय का माहौल है, वहीं आक्रोश भी देखा जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि यूरिया नदी से लगातार अवैध बालू खनन होने के कारण पुल धंसा है. पुल के धंसने की सूचना मंगलवार को हुई. ग्रामीणों ने जब सुबह देखा कि पुल का बीच का भाग धंस गया है, तो इसकी सूचना दोनों पंचायत के मुखिया संघ के अध्यक्ष दुखन चौधरी और शिवकुमार चौधरी (मुखिया पति) को दी. मुखिया ने तुरंत इसकी जानकारी मेराल थाना प्रभारी गुप्तेश्वर तिवारी को दी. थाना प्रभारी ने मुखिया से कहा कि अभी वह क्राइम केस में फंसे हुए हैं, समय निकालकर देख लेंगे. बाद में मुखिया द्वारा पुल धंसने की जानकारी देने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज कुमार तिवारी और अंचल अधिकारी राकेश कुमार सहाय से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जिला में बैठक के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका.

ग्रामीणों ने कहा- प्रशासन की लापरवाही से धंसा पुल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बालू माफियाओं द्वारा अगर बालू का अवैध उठाव नहीं होता, तो आज पुल धंसने की नौबत नहीं आती. प्रशासन इसको लेकर सख्त रहता, तो पुल के डेंजर जोन से बालू का उठाव नहीं होता. यूरिया नदी पुल से मेराल दक्षिणी की सभी पंचायतें एवं इर्द-गिर्द के गांव प्रखंड मुख्यालय से जुड़ते हैं. पुल के धंसने के बाद गांवों का संपर्क टूट गया है. स्कूली छात्र-छात्राओं एवं व्यवसायी को मेराल आने के लिए 10 से 15 किलोमीटर घूमकर रास्ता अपनाना पड़ेगा.

मुखिया का क्या है कहना

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हासनदाग के मुखिया दुखन चौधरी ने कहा कि वह पूर्व में भी पुल के धंसने के संबंध में विभागीय एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी, जिला के उपायुक्त और डीडीसी को आवेदन दे चुके हैं, जिसकी रिसीविंग भी है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी. नतीजतन पुल धंस गया. चौधरी ने कहा कि इस पर जल्द से जल्द प्रशासन कार्रवाई करते हुए दूसरे पुल का निर्माण कराये.

बालू खनन के कारण बनी ऐसी स्थिति

करकोमा पंचायत के मुखिया पति शिवकुमार चौधरी ने कहा कि बालू माफियाओं द्वारा पुल के नजदीक बालू उठाने के कारण ऐसी स्थिति बनी. प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर इस पर रोका लगायी गयी होती, तो आज यूरिया नदी पर पुल नहीं धंसता. इसका जिम्मेदार पूरी तरह से प्रशासन है. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा समय रहते प्रशासन को आगाह किया गया था. रोष व्यक्त करनेवाले ग्रामीणों में कोमल चौधरी, सुनील कुमार चौबे, रंजीत चौबे, मुन्ना चौबे, मनीष ठाकुर, जी अंसारी, गुदुस चौबे, संतोष चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, मथुरा चौधरी, शिव कुमार चौधरी, राजेंद्र चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं.

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