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जमशेदपुर घाघीडीह सेंट्रल जेल बना गैंगवार का अड्डा, सुधरने की बजाए  कैदी हो रहे हैं खूंखार

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Jamshedpur : किसी भी अपराधी को जेल में लाये जाने का मकसद सुधार करना ही होता है. लेकिन घाघीडीह जेल में इन दिनों अपराधी हावी हो गये हैं. जिले का घाघीडीह सेंट्रल जेल अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है.

जेल में बंद कुख्यात अपराधी जेल से ही अपना गिरोह चला रहे हैं. जेल में रहकर भी रंगदारी की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा घाघीडीह सेंट्रल जेल गैंगवार का अड्डा बन भी गया है. आये दिन घाघीडीह जेल में अपराधियों के दो गुटों के बीच मारपीट होती रहती है. साथ ही यहां जेल में अपराधी एक-दूसरे पर जानलेवा हमले का भी कर रहे हैं.

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वर्चस्व व रंजिश को लेकर घटना में हुई बढ़ोतरी

घाघीडीह सेंट्रल जेल में हाल के दिनों में दो गुटों के अपराधियों के बीच मारपीट की घटना और एक दूसरे पर जानलेवा हमला करने की घटना में बढ़ोतरी हुई है. दो गुट के अपराधी आपसी रंजिश और वर्चस्व को लेकर एक दूसरे के साथ मारपीट कर रहे हैं. पिछले एक-दो महीने के दौरान जेल के अंदर दो गुटों के बीच दो बार भिड़ंत हो चुकी है.

पलामू के गैंगस्टर से 14 सिम हुए थे बरामद

जेल से आपराधिक गतिविधियों के संचालन का प्रत्यक्ष उदाहरण तब मिला, जब घाघीडीह जेल में बंद पलामू के गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के गुर्गों के पास से 14 से अधिक मोबाइल सिम बरामद हुआ.

पुलिस ने 3 जनवरी 2019 में दो गुर्गों को गिरफ्तार भी किया,  तो  उसमें यह सामने आया कि बरामद सिम से गुर्गें पलामू के कारोबारियों से रंगदारी मांग कर रहे थे.

अखिलेश और परमजीत सिंह गुट में होता  रहता है टकराव

गैंगस्टर अखिलेश सिंह और जेल में मारे गए परमजीत सिंह के गुर्गों के बीच अक्सर टकराव भी होते रहते हैं. खुफिया विभाग हमेशा इसे लेकर अलर्ट भी करता रहा है.

वहीं जेल में विवाद के बाद ही गैंगस्टर अखिलेश सिंह और उसके सहयोगी कन्हैया सिंह, सुधीर दुबे, विक्रम शर्मा, मोहन समेत 11 को राज्य के दूसरे जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था. क्योंकि घाघीडीह जेल में वर्चस्व और रंजिश को लेकर मारपीट होती रहती है.

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कई कुख्यात अपराधी हैं जेल में बंद

मिली जानकारी के मुताबिक, घाघीडीह जेल में राज्य के कई कुख्यात अपराधी बंद हैं. इनमें गैंग्स ऑफ वासेपुर के फहीम, पलामू के विकास समेत एक दर्जन ऐसे कैदी हैं, जिनका अपने शहरों के अलावा राज्य और दूसरे राज्यों तक खौफ व वर्चस्व रहा है. इन अपराधियों के अलग-अलग गुट हैं. वर्ष 2009 में इसी जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में कुख्यात अपराधी परमजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल

20 मार्च को जहां अखिलेश सिंह के शूटर हरि सिंह पर नीरज दुबे गिरोह के द्वारा जानलेवा हमला किए गया. जबकि 6 मई को राजा सिंह और गुड्डू गोस्वामी के गिरोह के बीच मारपीट हुई. इसके बाद एक बार फिर से घाघीडीह सेंट्रल जेल की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

एक तरह जहां जेल प्रशासन जेल में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम बता रहे हैं. तो दूसरी ओर दो गिरोह के बीच लगातार हो रहे मारपीट की घटना और जानलेवा हमला जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है.

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घाघीडीह सेंट्रल जेल में दो गुटों के बीच मारपीट की घटनाएं

6 मई 2019 : घाघीडीह सेंट्रल जेल में सजा काट रहे कैदियों के दो गुटों के बीच भिड़त हो गई. एक गुट कैदी राजा सिंह का था तो दूसरा गुड्डू गोस्वामी का. भिड़ंत के दौरान राजा सिंह ने एल्यूमिनियम के चम्मच से चाकू बना गुड्डू पर हमला कर दिया था.

23 मार्च 2019 : जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में दो गुटों के बीच मारपीट हुआ था. देर रात डॉन अखिलेश सिंह के शूटर हरि सिंह पर नीरज दुबे गिरोह के रोहित सिंह उर्फ पटपट और अमित मिश्रा ने जानलेवा हमला कर दिया था. इसके बाद दो गुटों के बीच पहले तो झड़प हुई , लेकिन फिर मारपीट हो ने लगी. इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई थी.

24 जुलाई 2016 :  घाघीडीह जेल में 5 मई को भी कैदियों के दो गुटों में मारपीट हुई थी. बताया जाता है कि सुलतान और शाहरूख के बीच मारपीट हुई थी.

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