
Gopalganj : गोपालगंज में गंडक का पानी कम जरूर हुआ है, लेकिन लोगों की परेशानी वैसे ही बनी हुई है. अब भी जिले के कई प्रखंडों में बाढ़ का कहर है. मांझागढ़ प्रखंड की बात करें तो यहां कई गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुसा हुआ है. बाढ़ के बाद भी गांवों से पानी निकासी नहीं हो पा रही है ऊपर से बारिश परेशानी बढ़ा रही है.
लोग टूटी हुई झोपड़ी की छत पर रह कर दिन बिता रहे हैं. या फिर बाढ़ पीड़ित एक दूसरे के घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं. वहीं, खाना भी बना रहे हैं और जैसे तैसे दिन काट रहे हैं. मांझागढ़ प्रखंड में बाढ़ पीड़ितों को अब तक न तो कोई सरकारी मदद मिली है और न ही उनका कोई हालचाल लेनेवाला है.
माझागढ़ प्रखंड के मंगुरहा और विशुनपुरा गांव में बाढ़ से ज्यादा तबाही है. सैकड़ों झोपड़ियां और पक्के मकान बाढ़ के पानी में डूब गये हैं.
इसे भी पढ़ें : मंत्रिमंडल विस्तार के बहाने बिहार में खूब हो रही सियासत, निशाने पर नीतीश
मंगुरहा गांव के 48 वर्षीय किसान सुजीत यादव पिछले 5 दिनों से अपनी टूटी हुई झोपड़ी की छत पर शरण लिये हुए हैं.

सुजीत यादव के मुताबिक उन्होंने अपने परिवार के सभी सदस्यों को दूसरे के घरों में भेज दिया है, लेकिन खुद वे अपनी झोपड़ी में रह कर दिन-रात काट रहे हैं. उन्हें किसी नाव से आनेवाले लोग या कोई ग्रामीण आता है, तो कुछ खाने को दे देता है. नहीं तो वे वहीं पर पड़े रहते हैं.
सुजीत यादव के अलावा मंगुरहा और बिशनपुरा गांव के दर्जनों परिवार के लोग ऐसे ही किसी तरह अपना दिन काट रहे हैं. घर में बचे हुए चावल या रोटी खाकर पेट भर रहे हैं.
इस गांव में एक छोटी सी झोपड़ी में ही परिवार के सभी सदस्य मुश्किल से दिन काट रहे हैं. बाढ़ पीड़ितों के मुताबिक जिला प्रशासन के द्वारा अब तक उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है जिससे उनकी परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है.
इसे भी पढ़ें :तेज प्रताप यादव ने शुरू किया अपना नया बिजनेस, खूब हो रही है तारीफ




