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‘बिग बाजार’ वाला फ्यूचर रिटेल भी दीवालिया होने के कगार पर, किशोर बियानी का भी नंबर आ ही गया

New Delhi : देश की कंपनियां दीवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं. ताजा मामला किशोर बियानी की कंपनी फ्यूचर रिटेल का है. फ्यूचर रिटेल की माली हालत खस्ता हो चुकी है. उसे अपने कूपन होल्डरों को 105 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में देने हैं. यदि कंपनी 24 अगस्त को यह रकम नहीं चुका पाती है तो वह डिफॉल्ट में चली जायेगी.

डिफॉल्ट में जाने के बाद कंपनी की रेटिंग घट सकती है. कंपनी की हालत लॉकडाउन के पहले से ही खराब थी. लॉकडाउन में कंपनी की आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब हो गयी. अब हालात यह है कि कंपनी के पास ब्याज देने के भी पैसे नहीं हैं.

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हर संभव लोन ले चुकी है कंपनी

कंपनी की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसने बैंकों से हर संभव लोन ले लिया है. सितंबर 2019 में फ्यूचर ग्रुप पर कुल 12,779 करोड़ रुपये का कर्ज था. फ्यूचर रिटेल पर 2657 करोड़ रुपये का कर्ज मार्च 2019 तक था. इस ग्रुप को लोन देनेवाले एक बैंक के सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस ग्रुप से जुड़े जितने भी बैंक थे, उन्होंने अपनी तरफ से काफी प्रयास किया है, अब देखना है कि कंपनी इस संकट से उबर पाती है या नहीं. उन्होंने कहा कि फ्यूचर ग्रुप ने कोविड-19 इमरजेंसी के दौरान उपलब्ध जितने भी लोन थे, वो सब ले लिया है.

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लॉकडाउन की वजह से पड़ा बुरा असर

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को जो जानकारी दी है उसमें कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश भर में जो लॉकडाउन लगाया गया उसकी वजह से कारोबार पर बुरा असर पड़ा. इस वजह से कंपनी की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गयी और 22 जुलाई को वह इंटरेस्ट पेमेंट नहीं कर पायी. कंपनी ने कहा कि इसके बाद पेमेंट के लिए हमें अतिरिक्त 30 दिनों का वक्त दिया गया था, लेकिन अब ये 30 दिन की मोहलत भी खत्म हो गयी है.

फ्यूचर ग्रुप को लोन देनेवाले एक अन्य बैंक के अधिकारी के अनुसार आरबीआइ के 6 अगस्त के Covid-19 रेज्योलूशन फ्रेमवर्क के मुताबिक, लोन को अगले दो साल के लिए रीस्ट्रक्चर किया जा सकता है. अधिकारी ने कहा कि इस विकल्प के लिए आरबीआइ के सर्कुलर को देखना होगा. उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि कंपनी की संपत्ति को बेच कर पैसा वसूल किया जा सकता है या नहीं. उन्होंने कहा कि अन्य विकल्पों पर भी विचार करना होगा.

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