JharkhandRanchi

और… देखते ही देखते रांची-गुमला हाईवे पर से गुम हो गया जेपी उद्यान

Pravin Kumar

Ranchi: रांची में जमीन लूट के मामने आजतक के अपने सभी रिकॉर्ड लगभग तोड़ चुके हैं. नतीजा सामने है. जीएम लैंड हो या आर्मी लैंड प्रशासन की मदद से माफिया, दबंग बेखौफ होकर जमीन का धंधा कर रहे हैं. इसी कड़ी में एक रांची का उद्यान अपनी जगह से लापता हो गया है. उसे ढूंढने की कोशिश की तो, पता चला कि करीब सात एकड़ वाला उद्यान गुमशुदा है. उसकी कोई खोज खबर नहीं मिल रही है. उसकी तलाश करने पर वहां ऊंचे-ऊंचे भवन और इमारतें दिखी. बात हो रही है रांची-गुमला हाईवे पर डीएवी के पास के जेपी उद्यान की.

देखते ही देखते खो गया…

Catalyst IAS
ram janam hospital

रांची जिला सरकारी भूमि पर नाजायज तरीके से कब्जा करने के कई मामले सामने आ चुके हैं. खासकार हेहल अंचल में ऐसे ही कई मामले न्यायालय में भी लंबित हैं. और कई मामलो में जांच के बाद कार्रवाई के नाम पर सरकार की ओर से सिर्फ खानापूर्ति ही देखी जा रही है. ऐसा ही एक मामला जेपी उद्यान से जुड़ा हुआ है. रांची गुमला नेशनल हाईवे पर डीएवी स्कूल के समीप जेपी उद्यान की आधारशिला 1978 -79 में रखी गई थी. यह उद्यान 7.8 एकड़ में फैला हुआ था. उस दौरान रांची के लोग पिकनिक मनाने के लिए जेपी उद्यान जाया करते थे .लेकिन आज वह उद्यान गुम हो गया. अब वहां पर दुकानें और बड़े-बड़े भवन बन गये.

The Royal’s
Sanjeevani

जनआंदोलन के जनक जयप्रकाश नारायण के नाम पर बना था उद्यान

77 के जनआंदोलन के बाद  बिहार में सता परिवर्तन हुआ. उसके बाद जेपी के नाम पर 7.8 एकड़ में सुदंर पार्क  बनाया गया था. 25 जून को आपातकाल के 44 साल होने को हैं.भारत की राजनीति को एक नयी दिशा देने वाले जेपी आंदोलन की चर्चा अक्सर होती रहती है. आजादी के बाद जयप्रकाश नारायण को सरकार में शामिल होने कहा गया था. ऐसा कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें गृह मंत्री का पद लेने के लिए कहा था.

उन्होंने इनकार कर दिया. जयप्रकाश नारायण को आजादी के बाद जनआंदोलन का जनक माना जाता है. 1973 में देश में महंगाई और भ्रष्टाचार का दंश झेल रहा था. इससे चिंतित हो उन्होंने एक बार फिर संपूर्ण क्रांति का नारा दिया. जेपी आंदोलन से जुडे़ कई नेता आज अलग-अलग राज्यों के सता शीर्ष पदों पर बैठे हुए है. झारखंड के मुख्यमंत्री भी जेपी आंदोलन से जुड़े होने की बात कहते हैं.  लेकिन रांची में जेपी के नाम पर बने उद्यान को वे बचा नही सके.

दोषी अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया

वरिष्ठ पत्रकार मधुकर कहते हैं 1991-92 में बिहार विधान सभा और विधान परिषद की संयुक्त कमेटी सरकारी जमीन और तालाबों पर कब्जा होने का मामला उजागर होने के बाद बनी थी. जिसके अध्यक्ष गौतम सागर राणा थे, कमिटी की सिफारिश के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई और दोषी अधिकारियों को बर्खास्त भी कर दिया गया. लेकिन वर्तमान समय में झारखंड बनने के बाद अवैध रूप से जमीन पर कब्जा बढ़ गया है,  जिस पर सरकार की ओर से कोई कार्यवाई नही हो रही है.

ऐसे में जेपी उद्यान की जमीन का किसी व्यक्ति के द्वारा बंदोबस्त कर लिया जाना काफी गंभीर मामला है. वर्तमान राज्य सरकार के मुखिया रघुवर दास भी खुद को जेपी आंदोलन की उपज बताते हैं. ऐसे में रांची राजधानी में जेपी उद्यान को हड़प लिया जाना रघुवर दास के जेपी आंदोलन से जुड़े रहने पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है.

प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य एवं राज्य 20 सूत्री के सदस्य और पूर्व प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष डॉ सूर्यमणि सिंह कहते हैं कटहल मोड़ के समीप 7.8 एकड़ में जेपी उद्यान हुआ करता था. इस उद्यान में के बगल से एक नदी बहती थी लोग वहां पिकनिक मनाने के लिए जाते थे लेकिन अभी उद्यान नहीं है वहां पर दुकानें खुल गयी  हैं. जमीन का निजी तौर पर बंदोबस्त करा लिया गया है. जेपी उद्यान की जमीन पर किसी व्यक्ति का कब्जा होना राज्य के लिए बड़ा गंभीर  मामला है. इससे राज्य सरकार के भू राज्स्व विभाग के क्रियाकलाप पर भी प्रश्न खड़ा होता है .

Related Articles

Back to top button