न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मिड ब्रेन एक्टिविटी से आपके बच्चे बन सकते हैं ऑल राउंडर

 जापानी के साथ वैदिक तकनीक से दिया जा रहा है बच्चों को प्रशिक्षण

179

 दीपक सिंह

Ranchi : क्या आप अपने बच्चे को ऑल राउंडर बनाना चाहते हैं, तो अब बच्चे की पीछे-पीछे भागने से बेहतर है कि बच्चों को मिड ब्रेन प्रशिक्षण दिया जाये. मिड ब्रेन एक्टिविटी एक ऐसा क्रियाकलाप है, जिसमें लेफ्ट और राइट ब्रेन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए मिड ब्रेन को सक्रिय किया जाता है. जिससे कई बार बच्चे एक साथ दो क्रियाकलाप कर सकते हैं,  जो कि सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं है  मिड ब्रेन एक तरह से बच्चों के तीसरी आंख को खोलने का काम करता है. इसे सिक्स्थ सेंस ओपनर के नाम से भी जाना जाता है. यह तकनीक पूरी तरह से जापानी पद्धति है, लेकिन हाल के दिनों में वैदिक मंत्रों के जरिये इसकी भारतीय तकनीक को भी खोज निकाला गया है.

सामान्य मनुष्य अपने मस्तिष्क की क्षमता का सिर्फ दो से तीन प्रतिशत ही उपयोग कर पाता है, जबकि अल्बर्ट आइंसटाइन जैसे बुद्धिजीवी अपने मस्तिष्क की क्षमता का 11 प्रतिशत भाग का उपयेाग करते थे. मानव मस्तिष्क की क्षमता औसतन 2.5 लाख गीगाबाइट होती है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्य मनुष्य अपने ब्रेन लेवल का कितना कम प्रयोग करता है.

hosp1
 ममता बनर्जी दुर्गा पूजा कमेटियों को देंगी 10-10 हजार, लोकसभा चुनाव है लक्ष्य 

जापानी और वैदिक तकनीक में अंतर :  मिड ब्रेन एक्टिविटी पूरी तरह से जापानी तकनीक है. जापान में प्राथमिक शिक्षा के साथ ही बच्चों को एक्टिविटी करायी जाती है. पिछले छह से सात सालों में भारत में इसका प्रचलन देखा जा रहा है. जहां जापानी तकनीक में प्राकृतिक ध्वनियों जैसे नदियों के बहने की आवाज, झरने, बिजली की आवाज आदि का प्रयोग किया जाता है . वहीं वैदिक पद्धति में शिव मंत्रों का प्रयोग किया जाता है. दोनों ही तकनीक के जरिये बच्चों के मस्तिष्क में समन्वय स्थापित करने का काम किया जाता है.

क्या है इसके फायदे : लक्ष्य निर्धारण, स्मरण शक्ति तेज होना, ध्यान केंद्रण, आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता का विकास, देख के याद रखने की क्षमता का विकास, बंद आंख में देखने और पढ़ने की क्षमता, कला के प्रति रूचि आदि का विकास हेाता है.

क्या है सीखने की प्रक्रिया : मिड ब्रेन एक्टिविटी 5 से 16 साल तक बच्चे सीख सकते हैं. जबकि वैदिक तकनीक में 8 से 21 साल तक के युवा सीख सकते हैं. जापानी पद्धति में बच्चों के तीन तीन घंटे के 10 क्लास लिये जाते हैं, जिसमें व्यायाम, मेडिटेशन समेत आखिर में एक घंटे की नींद दी जाती है, जिस दौरान बच्चों को अलग अलग ध्वनियां सुनायी देती हैं. वहीं वैदिक पद्धति से सात दिन के क्लास होते हैं, जिसमें शिव मंत्रों का प्रयोग किया जाता है.

पूर्व में जापानी पद्धति से बच्चों को मिड ब्रेन प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन हालिया दिनों में हुए शोध के बाद अब वैदिक पद्धति से बच्चों को मिड ब्रेन प्रशिक्षण दिया जा रहा है.  रांची जैसे शहर में अभी इसका प्रचलन कम है, लेकिन आने वाले दिनों में लोगों की रुचि बढ़ने की संभावना है.

लेखक  वैदिक शक्तिज के  बिजनेस एसोसिएट हैं

इसे भी पढ़ें –  कई IAS जांच के घेरे में, प्रधान सचिव रैंक के अफसर आलोक गोयल की रिपोर्ट केंद्र को भेजी, चल रही विभागीय कार्रवाई

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: