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48 सालों तक राज करने वालों के वंशज पूछ रहे कि कृषि की योजनाएं लंबित क्यों हैं : केंद्रीय कृषि मंत्री

ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का राजनीतिक बयान

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Ranchi: झारखंड के किसानों की आय दोगुनी हो जाए. उन्नत तरीके से किसान किसानी करें. राज्य दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जायें. इसी मकसद से मोमेंटम झारखंड की अगली कड़ी की तर्ज पर झारखंड की राजधानी रांची के खेलगांव में ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट का आयोजन किया गया. आयोजन के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि राधा मोहन सिंह थे. अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस की सरकार और गांधी परिवार को अपने निशाने पर रखा. उनका संबोधन शुद्ध रूप से राजनीतिक था. जबकि मंच पर चीन, ट्यूनीशिया, मंगोलिया, इजरायल और फिलीपींस के राजदूत मौजूद थे. साथ ही कोका कोला, मदर डेयरी और अमूल के शीर्ष अधिकारी भी मंच पर मौजूद थे. उन्होंने कहा कि बताइए भला किसी भी लोकतांत्रिक देश में एक ही परिवार के लोग 18 सालों तक शासन करते हैं क्या. 48 सालों तक शासन करने के बाद अब उसी परिवार के वंशज पूछ रहे हैं कि आखिर कृषि विभाग की योजनायें लंबित क्यों हैं. ऐसा पूछने से पहले उन्हें शर्म आनी चाहिए. लेकिन शायद शर्म नाम की चीज उनमें बची नहीं है.

भाग्यशाली है देश और भाग्यशाली है झारखंड, कुछ ने झारखंड को संसद में बेच दिया

समिट के मंच से अपने राजनीतिक भाषण में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत तो भाग्यशाली है ही जो उसे नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिला. साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने साढ़े चार सालों में एक भी दिन छुट्टी नहीं ली. पूरी तरह से वो देश के लिए समर्पित हैं. वहीं झारखंड भी भाग्यशाली है, जो उसे रघुवर दास के जैसा सीएम मिला. अपने भाषण में आगे बोले कि जब अटल जी ने झारखंड को एक राज्य का दर्जा दिया तो यहां के कुछ लोग आदिवासियों के भला करने के नाम पर राजनीति करने लगे. लोगों से वोट लिया और संसद में जाकर बिक गए. हमेशा वो लोग अपने वंश के बारे सोचते रहे. लेकिन रघुवर दास ऐसे नहीं हैं, वो खनन के साथ-साथ किसानों के बारे में भी सोच रहे हैं. यही वजह है कि बीते चार सालों में झारखंड का कृषि क्षेत्र में ग्रोथ रेट – 4% से बढ़कर 14% हो गया. यानि 19% की वृद्धि. इसके अलावा कहा कि कांग्रेस के समय में देशभऱ का कृषि का बजट अधिकतम 1.23 लाख करोड़ था. लेकिन बीजेपी ने इसे बढ़ाकर 2.11 लाख करोड़ का बजट बनाया. इस बात से साबित होता है कि देश के बारे में कांग्रेस सोचती है या बीजेपी.

19 फीसदी ग्रोथ होने के पीछे डबल इंजन का कमाल : सीएम 

2013-14 में झारखंड में कृषि का ग्रोथ रेट -4% से बढ़कर 14% हो गया. ऐसा सिर्फ और सिर्फ यहां के युवा किसानों की मेहनत से हुआ है. लोग कहते थे कि डबल इंजन का क्या फायदा होता है. आज मैं कहना चाहूंगा कि यही होता है डबल इंजन का कमाल (केंद्र और राज्य में एक ही सरकार). ऐसा कमाल करने में हमारी किसान बहनें भी हैं. कृषि विभाग की तरफ से दो बार सौ-सौ किसानों को इजरायल भेजा गया, ताकि वो वहां की उन्नत कृषि के गुर सीख सकें. अगले साल से झारखंड से महिलाओं को भी विदेश भेजा जाएगा. वो भी वहां से किसानी सीख कर आयेंगी और यहां के किसानों के लिए एक रोल मॉडल बनने का काम करेंगी. उन्होंने कहा कि आजादी के 67 साल हो गए हैं. इन बीते सालों में गांवों की जितनी सूरत बदलनी चाहिए थी, उतनी बदली नहीं है.

सीएम का युवाओं को पाठ

राज्य के किसान खुद की और राज्य सरकार की तिजोरी भरने का कार्य करें. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि किसान सिर्फ सब्जी उत्पादन में ही केंद्रित ना रहें. कृषि कार्य के साथ बागवानी, पशुपालन और सोलर फार्मिंग में भी ध्यान दें. सरकार इन कार्यों में आपको सहयोग प्रदान करेगी. सोलर फार्मिंग करने वाले किसानों की बिजली को तीन रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीद लिया जाएगा. अगर किसान खेती के साथ अन्य को भी साथ लेकर कार्य करते हैं तो 2022 तक किसानों की आय दोगुना नहीं चार गुना हो सकता है. नौजवान किसान डेयरी उद्योग की ओर ध्यान दें. आपको 50% अनुदान पर गाय उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार ने 25 हजार BPL महिलाओं को 90% अनुदान पर 2 गाय उपलब्ध कराया है.

सीएम की घोषणाएं :

–     28 लाख किसानों को 2021 तक स्मार्ट फोन, 2019 से ही योजना शुरू

–     बिना ब्याज के एक साल तक के लिए किसानों को लोन

–     किसानों को बीमा का पैसा नहीं लगेगा, प्रीमियम भी सरकार देगी

–     2019 तक राज्य के किसानों के लिए अलग फीडर तैयार हो जाएगा, छह घंटे मिलेगी बिजली

–     उद्योग के लिए दिया जाएगा अलग फीडर

–     2019 अगस्त तक गांवों में 24*7 बिजली की सुविधा

–     युवा किसानों को डेयरी से जुड़ने के लिए 50 फीसदी सब्सीडी

जानने लायके बातें

–     50 फूड प्रोसेसिंग यूनिट की आधारशिला रखी गई

–     समिट के साझेदार देश चीन, ट्यूनीशिया, मंगोलिया, इजरायल और फिलीपींस के प्रतिनिधि

–     16 राज्यों के 10 हजार किसान, 50 से अधिक वक्ता का आगमन

–     271 करोड़ का निवेश, 6000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार

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