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गड़बड़झालाः मुखिया-बिचौलियों का कमाल, फर्जी लाभुक का बनवा दिया पीएम आवास

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Latehar: जिले के बरवाडीह प्रखंड के बेतला पंचायत एकबार फिर प्रधानमंत्री आवास योजना में वित्तीय अनियमितता के मामले को लेकर चर्चा में है. मुखिया व बिचौलिया की सांठगांठ से वास्तविक लाभुक के आवास की जगह रिश्वतखोरी कर फर्जी व्यक्ति का आवास निर्माण पूरा करा दिया गया है और सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बीडीओ ने बगैर पीएम आवास का भौतिक सत्यापन किए, राशि का भुगतान भी कर दिया.

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चार किस्तों में की गई निकासी

जानकारी के अनुसार, बरवाडीह प्रखंड के बेतला पंचायत के बेतला गांव निवासी नूरहसन मियां के पुत्र मंजूर आलम को वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिला था. जिसकी स्वीकृति संख्या (जेएच1193052) है. लेकिन, मुखिया, पंचायत सेवक व बिचौलियों ने सांठगांठ कर मिलते-जुलते नामवाले फर्जी व्यक्ति मंसूर अंसारी के नाम पर गलत जियो टैगिंग कर चार किस्तों में राशि की निकासी कर ली.

29 अप्रैल, 2017 को पहली किस्त 26 हजार रुपए, सात जुलाई, 2017 को दूसरी किस्त 32500 रुपए, 22 सितंबर, 17 को 52 हजार रुपए की तीसरी तथा 12 दिसंबर, 2017 को चौथी किस्त के रूप में 13 हजार रुपए कुल एक लाख 23 हजार 500 रुपए निकाल लिए. आरोप है कि मुखिया संजय सिंह व बिचौलिया सह पारा शिक्षक अब्दुल हलीम ने मंसूर से रिश्वतखोरी कर पंचायत सेवक से मिलकर उसका आवास निर्माण पूरा करा दिया. ऐसे में वास्तविक लाभुक मंजूर आलम आवास के लाभ से वंचित रह गया.

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गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले इसी प्रकार का मामला कुटमू ग्राम निवासी सुरेश राम के पीएम आवास का सामने आया था. इसकी जांच जनसेवक मनीष पांडेय एवं बरवाडीह के प्रखंड समन्वयक हेमंत कुमार ने की थी. इसमें मुखिया संजय सिंह, पंचायत सेवक संतोष कुजूर व स्वयंसेवक रघुनंदन राम स्पष्ट तौर पर दोषी पाए गए हैं, लेकिन अब तक इन तीनों में से किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकी है.

फर्जी लाभुक मंसूर ने खोला राज

उपरोक्त मामले से अनभिज्ञ आवास के फर्जी लाभुक मंसूर अंसारी ने बताया है कि मुखिया संजय सिंह और बिचौलिया अब्दुल हलीम मेरे घर पर आए थे और मुझसे कहा कि तुम्हारे नाम से पीएम आवास आया है. आवास दिलाने के एवज में उन्होंने मुझसे 10 हजार रुपए की मांग की, जिसपर मैंने उन्हें तत्काल पांच हजार रुपए दे दिए. इसपर दोनों ने कहा कि शेष पांच हजार रुपए आवास का पैसा आने के बाद देना होगा, जिसपर मैंने हामी भर दी. इसके बाद दोनों ने मेरा आधार कार्ड, बैंक पासबुक व फोटो लिया और चलते बने.

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राशि रिकवरी का मिला नोटिस

जब घर बनाने के बाद, मंसूर आलम के पास बरवाडीह ब्लॉक से आवास की राशि वापस करने का नोटिस आया, तब उसे सच्चाई का पता चला. उसने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा है कि मुखिया व बिचौलियों ने पैसों के लालच में मुझे अंधकार में रखा. फर्जी लाभुक ने सफाई में कहा कि सच्चाई का पता होता तो यह आवास कभी नहीं लेता. अब मंसूर आलम के सामने ये समस्या है कि वो आवास बनाने के चक्कर में पहले से ही कर्ज तले दबा है, ऐसे में आवास की राशि कहां से लायेगा. मंसूर आलम ने कहा कि प्रशासन को दोषी मुखिया और बिचौलिया पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने धोखाधड़ी की है. उसने बताया संबंधित आवेदन कि मैंने उपायुक्त को पूर्व में ही दे दिया है. इस मामले से जुड़े वीडियो रिकॉर्डिंग समेत कई पुख्ता प्रमाण मौजूद है.

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बीडीओ को नहीं मामले की जानकारी

बरवाडीह बीडीओ दिनेश कुमार ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. मामले की जांच कर दोषियों पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने स्वीकार भी किया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के पीएम आवास योजना में भारी गड़बड़ी की गई है. लेकिन, यहां गौर करनेवाली बात यह है कि बरवाडीह प्रखंड में बीडीओ दिनेश कुमार ने अगस्त, 17 में विधिवत पदभार ग्रहण किया था. उसके एक माह बाद ही 22 सितंबर, 17 को आवास की तीसरी किस्त 52 हजार रुपए तथा 12 दिसंबर, 2017 को चौथी किस्त के रूप में 13 हजार रुपए भुगतान फर्जी लाभुक मंसूर के खाते में कर दिया गया. ऐसे में बीडीओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.

इधर लातेहार डीडीसी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि, वित्तीय वर्ष 2016-17 में पीएम आवास में काफी गड़बडिय़ां हुई हैं. बेतला पंचायत के एक-एक आवासों की जांच जिला स्तरीय टीम द्वारा कराई जाएगी.

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