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जालसाजीः चतरा, जामताड़ा, बोकारो और गुमला में प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप को दूसरी सरकारी योजना बता भरवा दिया फॉर्म

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Chhaya

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Ranchi: प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप में जालसाजी का मामला सामने आया है. जहां छात्रों से स्कॉलरशिप का फॉर्म दूसरी सरकारी योजना बताकर भरवा गया. ऐसे एक नहीं कई मामले यूनाईटेड मिल्ली फोरम की ओर से लगाए गए शिविर में सामने आएं. दरअसल, फोरम की ओर से स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को छात्रवृत्ति फॉर्म भरने समेत अन्य जानकारी देने के लिए शिविर लगाया जाता है. फोरम के सचिव अफजल अनीस ने जानकारी दी कि जब स्कूलों और कॉलेजों में शिविर लगाया गया, तो कई छात्र ऐसे मिले जिनका पहले से फॉर्म भरा जा चुका था, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं थी कि फॉर्म प्री मैट्रिक का है.

जब छात्रों से पूछा गया कि छात्रवृति का फॉर्म कैसे भरा गया है तो कोई जवाब नहीं मिला. लेकिन जब ये पूछा गया कि किसी ने बैंक खाता और आधार कार्ड संख्या मांगा था. तब छात्रों और अभिभावकों ने बताया कि घर आकर कुछ लोगों ने सरकारी योजना के तहत रजिस्ट्रेशन किया था.

चार जिलों से ज्यादा मामले आये सामने

फोरम के सचिन ने बताया कि शिविर के दौरान चार जिलों में ऐसे मामले अधिक मिले है. जिसमें चतरा, जामताड़ा, बोकारो और गुमला है. कई छात्रों का फॉर्म दूसरे राज्य के छात्र बता कर भर दिया गया. पहचान नहीं उजागर करने के नाम पर उन्होंने बताया कि गुमला के एक छात्र का फॉर्म राजस्थान से हॉस्टलर बनाकर भर दिया गया. शिविर के दौरान फोरम को यह जानकारी मिली. बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ के छात्रों का नाम भी राज्य के छात्र बताकर फॉर्म भर दिया गया.

कई स्कूलों ने किया वेरीफाई

ऐसे छात्रों का बैंक खाता और आधार संख्या जब प्री मैट्रिक पोर्टल में डाला गया तो छात्र पहले से रजिस्ट्रड मिलें. पोर्टल यह भी दिखा रहा है कि ऐसे विद्यार्थियों को स्कूल ने भी वेरीफाई कर दिया है. अफजल ने जानकारी दी कि राज्य के कई जिलों में ऐसे मामले हुए है. जिससे पता चलता है कि कोई सिंडिकेट इस पर कार्य कर रहा है. वहीं कई मामलों में पाया गया कि छात्र उक्त स्कूल के ना होते हुए भी स्कूल ने फॉर्म वेरीफाई कर दिया है.

कई तरह का फर्जीवाड़ा

न सिर्फ दूसरे राज्य का बता कर फॉर्म भरने का मामला सामने आया. बल्कि कक्षा से दोगुणी उम्र, जिस स्कूल के नाम से फॉर्म भरा गया, छात्र का उस स्कूल में नामाकंन न होना जैसे फर्जीवाड़े भी सामने आएं हैं. ऑनलाइन फॉर्म वेरिफिकेशन के लिए 31 दिसंबर को पोर्टल बंद हो चुका है.

आधा पैसा मांगते हैं दलाल

फोरम के सदस्यों ने जब ग्रामीणों और छात्रों से इस संबध में बात की, तो पता चला कि समुह में आकर दलाल सरकारी योजना के तहत ग्रामीणों के खाते में पैसा आने की बात कहते. साथ ही दलाल ये भी कहते कि पैसा इसी शर्त पर दिया जाएगा कि आधा पैसा समूह, रजिस्ट्रेशन कर रहे दलालों को दिया जाएं.

वित्त निगम में शिकायत

झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम में इसके खिलाफ शिकायत की जा चुकी है. वर्तमान समय में निगम में प्रबंध निदेशक का पद रिक्त है. राज्य में प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति से संबधित कार्य अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की करती है.

कार्रवाई होने पर समाप्त हो सकता है स्कूलों का डायस कोड

फर्जी तरीके से छात्रों के फॉर्म वेरीफाई करने को लेकर स्कूलों पर नियमतः प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. जांच में स्पष्टीकरण मिलने पर ऐसे स्कूलों का डायस कोड भी समाप्त किया जा सकता है.

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