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कोविड को लेकर रिम्स में चल रहे 10 रिसर्च में चार सफल, छह शोध जारी

Anita Gupta

Ranchi: पहले फेज और दूसरे फेज में कोरोना ने पूरे राज्य में जिस तरह तबाही मचाई है, उससे भला कौन भूला सकता है. ऐसी ही स्थिति तीसरे फेज में उत्पन्न ना हो, इसके लिए रिम्स की क्रिटिकल टीम पूरी तरह से तैयार हो चुकी है.

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कोविड के मरीज कितने भी गंभीर स्थिति में क्यों ना हो, हर परिस्थिति में मरीजों की जान बचायी जा सके. मरीज की स्थिति को कैसे गंभीर होने से बचाया जा सके, उसे किसी दूसरे गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सके, कौन सी दवाई और कितनी मात्रा में दी जाए जिससे मरीज का सटीक इलाज हो सके और मरीज समय पर व जल्दी संक्रमण से मुक्त हो जाए; ऐसे कई तरह उद्देश्यों के साथ रिम्स क्रिटिकल डिपार्टमेंट की टीम पिछले एक साल में कोविड पर करीब 10 तरह के मेडिकल रिसर्च कर रही है.

इन रिसर्चों में 4 रिसर्च सफल हो चुके हैं, जिनका रिसर्च पेपर हाल ही में अमेरिका के जर्नल में प्रकाशित हुआ था. बाकी के 6 विषयों पर मेडिकल टीम रिसर्च कर रही है.

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ये रिसर्च चल रहे

1. कोरोना से मृत व्यक्तियों के बॉडीज टिसूज पर रिसर्च

वैसे व्यक्ति जिनकी मौत कोरोना से हुई है. मरने के बाद एक नॉर्मल बॉडी की अपेक्षा कोविड पॉजिटिव व्यक्ति के बॉडी टिशूज में किस तरह के बदलाव आए हैं. इसको लेकर डॉ प्रदीप भट्टाचार्य और डॉ पुष्पांजलि रिसर्च कर रहे हैं.

2. कोविड मरीज के यूरिन में हुए बदलाव पर रिसर्च

पैथोलॉजिस्ट डॉ पुष्पांजलि और बायोकेमिस्ट डॉ साकेत वर्मा ने कीटोन्युरिया रिसर्च को आगे बढ़ाते हुए कोविड मरीज के यूरिन में हुए बदलाव पर रिसर्च प्रारंभ कर दिया है. डॉ पुष्पांजलि ने बताया कि इस रिसर्च में वे कोविड पॉजिटिव मरीज के भर्ती होने के समय और इसके कुछ दिनों के बाद यूरिन की जांच करेंगे. जांच रिपोर्ट के माध्यम से वे पता करेगें कि उनके यूरिन में कब और किस प्रकार का बदलाव आ रहा है जिससे विभिन्न प्रकार के उसके शरीर में होने वाले अन्य बीमारी से पहले ही उस व्यक्ति को बचा सके.

3. वैक्सीन लेने के बाद कोविड पॉजिटिव हुए मरीजों पर रिसर्च

वैक्सीन लेने के बाद कई लोग कोविड पॉजिटिव और नॉन कोविड मरीज हॉस्पिटल पहुंचे. इनमें कई लोग गंभीर स्थिति में हॉस्पिटल में भर्ती हुए जो किडनी, लंग्स इंफेक्शन जैसी बीमारियों से ग्रसित थे. इसका कारण जानने के लिए रिम्स की टीम पोस्ट को- वैक्स स्टडी कर रही है जिसमें रिम्स की टीम के साथ संत जॉन मेडिकल कॉलेज बैंगलोर,आईबीएमएस पटना, अपोलो हॉस्पिटल नासिक और यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद की मेडिकल टीम शमिल है. रिम्स की ओर से यह रिसर्च डॉ जय प्रकाश और डॉ प्रदीप भट्टाचार्य कर रहे हैं.

4. कोविड के नेचर पर

डॉ जय प्रकाश ने बताया कि कोविड के दौरान अलग अलग मरीजों पर कोविड का अलग-अलग प्रभाव हुआ था. मरीजों में अलग-अलग लक्षण देखने को मिले थे. आखिर ऐसा क्यों हुआ, इसका पता लगाने के लिए 300 कोविड पॉजीटिव मरीजों के डाटा पर रिसर्च चल रहा है.

5. डॉ जय प्रकाश ने बताया कि कोरोना के दूसरे फेज में आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव होने के बाबजूद कई लोगों की स्थिति कोविड पॉजिटीव मरीज के जैसी पाई गई. सीटी स्कैन के माध्यम से उनके गंभीरता के बारे में पता चला. वैसे मरीजों की सिवियारिटी और मोटालिटी कितने प्रतिशत होगी, इसको लेकर रिम्स की टीम रिसर्च कर रही है.

6. कोविड पॉजीटिव मरीज की जान बचाने में हाई फ्लो नेजल कैन्नुला कितना लाभदायक है. हाई फ्लो पर कितने दिनों तक मरीज को रखने के बाद वह ठीक हो जायेगा. इसको लेकर डॉ प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ मोहम्मद सैफ और डॉ जय प्रकाश रिसर्च कर रहे हैं.

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ये टीम कर रही है रिसर्च

रिम्स व ट्रामा सेंटर के एचओडी डॉ प्रदीप भट्टाचार्य के नेतृत्व में डॉ जय प्रकाश (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ मोहम्मद सैफ खान (इंचार्ज ऑफ क्रिटिकल केयर डिपार्टमेट), बायोकेमिस्ट डॉ साकेत वर्मा और पैथोलॉजिस्ट डॉ पुष्पांजलि के द्वारा रिम्स में अभी कोविड को 6 भिन्न-भिन्न रिसर्च किया जा रहा है.

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ये रिसर्च हो चुके हैं सफल

1. मेटा एनालिसिस रिसर्च ऑफ रॉक्स इंडेक्स

अब रॉक्स इंडेक्स बताएगा कि कोरोना के गंभीर संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए उसका इलाज कब तक एचएफएनसी पर रख कर करना है और कब वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना है.

2. केटोन्यूरिया रिसर्च
कोरोना संक्रमित मरीजों को डायबिटिज और किडनी संबंधित बीमारियों से बचाने के लिए कीटोन्युरिया जांच जरूरी

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