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चार साल बाद भी पंचायत सचिवालय की योजनायें अधूरी, आज भी ग्रामीण काटते हैं प्रखंड अंचल कार्यालय के चक्कर

पंचायत सचिवालय को सुदृढ़ बनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि पंचायत का सबसे पिछड़ा अंतिम व्यक्ति भी सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही योजनाओं का लाभ उठा सकें.

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Gomia: गोमिया प्रखंड में 36 पंचायत हैं. लेकिन किसी भी पंचायत सचिवालय में अब तक सचिवालय संबंधी योजना धरातल पर नहीं देखी जा रही है. पंचायत के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत सचिवालयों को क्रियाशील बनाने की योजना लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप धरातल पर नहीं उतर पायी है. जबकि पंचायत सचिवालयों को क्रियाशील बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेकों घोषणाएं की गयीं. साथ ही पंचायत सचिवालयों की क्रियाशीलता के लिए प्रखंड सह अंचल अधिकारियों को कई निर्देश भी जारी किए गए. रघुवर सरकार के निर्देशों के आलोक में प्रखंड कार्यालयों में बैठक का आयोजन भी किया गया. निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक पंचायत सचिवालय में एक ही छत के नीचे पंचायत प्रतिनिधि मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत सेवक, रोजगार सेवक जनहित में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कराएंगे. ताकि पंचायत क्षेत्र में निवास करने वाले ग्रामीणों की अलावा आमजनों को भी कोई परेशानी ना हो. उसी एक छत के नीचे उन्हें सरकार की सभी योजनाओं का उचित लाभ मिल सके.

चार साल बीत गए, नहीं हुआ अनुपालन

सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों के मुताबिक, पंचायत के मुखिया को सप्ताह में 2 दिन पंचायत सचिवालय में बैठना सुनिश्चित किया गया था. इसके अलावा पंचायत के स्थाई समिति एवं ग्राम सभा के आठ समिति के बैठने का स्थान भी पंचायत सचिवालय में ही सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया था. साथ ही पंचायत सचिवालय में आए लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए एक शिकायत पेटी भी सचिवालय परिसर में लगाने की घोषणा की गई थी. पंचायत सचिवालय की दीवारों पर वित्त वर्ष के सभी विकास योजनाओं का ब्यौरा लिखवाने का भी निर्देश जारी किया गया, जिससे  हर क्षेत्र में सरकार की योजनाएं जनहित में पारदर्शी बन सकें.

पंचायत सचिवालय को सुदृढ़ बनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि पंचायत का सबसे पिछड़ा अंतिम व्यक्ति भी सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही योजनाओं का लाभ उठा सकें. लोगों के जाति, आवासीय, आय, जन्म एवं मृत्यु आदि के प्रमाण पत्र के लिए भटकना ना पड़े. वहीं प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के तहत पंचायत सचिवालय में कंप्यूटर,टेलीफोन आदि लगाकर पूर्णरूप से डिजिटल बनाने और रात्रि प्रहरी की व्यवस्था का निर्देश दिया गया था.

सरकार द्वारा जनहित में जारी इतने निर्देशों के बावजूद भी दुर्भाग्य है कि चार साल बीतने के बाद भी इनमें से किसी भी निर्देश का अनुपालन नहीं किया गया. सरकार की पंचायत सचिवालय को क्रियाशील बनाने की योजना  धरी की धरी ही रह गई. अभी भी लोगों को अपने कार्यों के निष्पादन के लिए प्रखंड अंचल कार्यालय के चक्कर ही काटने पड़ रहे हैं.

क्या कहती हैं बीडीओ

इस बाबत बीडीओ मोनी कुमारी से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में है. सरकार के निर्देशों के अनुपालन के लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश जारी किए गए हैं. लोगों को सरकार की योजना का पूरा लाभ मिले, इसके लिए भी प्रयास जारी है.

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