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पलामू: साल की पहली जेल अदालत में चार कैदी हुए रिहा

कैदियों को दी गयी निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी

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Palamu:  इस वर्ष की पहली जेल अदालत मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में लगायी गयी. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित जेल अदालत की अध्यक्षता प्राधिकार के सचिव प्रफुल कुमार ने की. इस जेल अदालत में दोष स्वीकारोक्ति बयान एवं सजा की नियत अवधि पूर्ण करने पर चार कैदियों को रिहा किया गया.

ये कैदी किये गये रिहा

प्राधिकार के सचिव श्री कुमार ने बताया कि तीन मामले रोहित कुमार न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एवं एक का राजेंद्र प्रसाद जिलाधिकारी के न्यायालय में चल रहे थे. दोष स्वीकारने और सजा की अवधि पूर्ण करने पर कैदियों को रिहा किया गया. रिहा हुए कैदियों में पंकज कुमार सिंह, सुरेश्वर भुईंया, बासुदेव भुईंया एवं रणविजय सिंह शामिल है. मौके पर कारा अधीक्षक प्रवीण कुमार, जेलर प्रमोद कुमार, पैनल अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय, प्रकाश रंजन एवं अनिल कुमार सिंह ने रिहा किये गये. मौके पर अतिथियों ने कैदियों को बेहतर जीवन जीने की सलाह दी.

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कैदियों को निःशुल्क दी गयी कानूनी जानकारी

जेल अदालत के बाद सेंट्रल जेल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में सेंट्रल जेल के कैदियों को शामिल किया गया. इसकी अध्यक्षता प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ने की. संचालन अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने किया. इस दौरान कैदियों को कई कानूनी जानकारी दी गयी. बताया गया की जेल में बंद बंदी अगर अधिवक्ता नहीं रख पा रहे हैं तो उन्हें डालसा की मदद से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा. इससे कैदी अपना पक्ष न्यायालय में रख सकते हैं.

दूसरे के अधिकार का हनन नहीं करें

प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि दूसरे का अधिकार हनन करेंगे तो आप का भी अधिकार सुरक्षित नहीं रहेगा. किसी के अधिकार का हनन करने की स्वतंत्रता कानून नहीं देता है. उन्होंने कहा कि प्ली बारगेनिंग के तहत मामले का निस्तारण करायें. उन्होंने विस्तार पूर्वक प्ली बारगेनिंग कानून के बारे में जानकारी दी. कहा कि 7 साल से कम सजा वाले और 14 वर्ष से ऊपर के लोगों प्ली बारगेनिंग कानून के तहत मामले का निस्तारण करा सकते है. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि कानून कवच के समान है. अधिकार का हनन हो तो कानून का सहारा लें. उन्होंने कहा कि जेल में बंद बंदियों और कैदियों के लिए भी जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने कई कार्यक्रम चला रखे हैं. लोगों को सुलभ न्याय मिले इसके लिए पैनल अधिवक्ता नियुक्त किये गये हैं.

इन कैदियों को दी जानी है मुफ्त कानूनी सहायता

पैनल अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे ने कहा कि जिनकी वार्षिक आमदनी एक एक लाख से कम हैं, कारा में संसिमित है, एसटी, एसई, प्राकृतिक आपदा से ग्रसित लोगों के लिए, दिव्यांग के लिए व महिलाओं के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि गांव गांव में जाकर प्राधिकार द्वारा लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने का काम कर रहा है. मौके पर प्राधिकार के सचिव ने विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया और महिला बंदियों से भी मुलाकात की. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की समस्या हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यालय में कार्य अवधि में अपनी समस्या रख सकते हैं. प्राधिकार का प्रयास होगा कि लोगों की समस्याओं का समाधान न्यायिक व्यवस्था के तहत की जा सके.

इस मौके पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रोहित कुमार, अनिल कुमार सिंह, अधिवक्ता प्रकाश रंजन समेत दर्जनों लोग उपस्थित थे.

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