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फिर फंसे राज्य प्रशासनिक सेवा के चार अफसर, मनरेगा कानून के उल्लंघन का आरोप

अधिकांश आरोप मनरेगा के तहत वित्तीय अनियमितता, मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन, अभिलेखों के संधारण में गड़बड़ी का है.

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  • चतरा के तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी सुबोध कुमार के तीन वेतन वृद्धि पर रोक
  • पाकुड़िया के तत्कालीन बीडीओ संतोष गर्ग के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश
  • रुद्र प्रताप को निंदन और संतोष कुमार को भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी

Ranchi : राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों पर लगातार आरोप लग रहे हैं. जनवरी में सात राज्यों के प्रशासनिक सेवा के अफसरों पर आरोप लग चुके हैं. इसमें अधिकांश आरोप मनरेगा के तहत वित्तीय अनियमितता, मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन, अभिलेखों के संधारण में गड़बड़ी का है. दो राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को निंदन और चेतावनी देते हुए, भविष्य में सचेत रहने का निर्देश दिया गया है.

सालभर गायब रहे, तीन वेतन वृद्धि पर रोक

चतरा के तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी सुबोध कुमार छह सितंबर 2017 से लगातार अनाधिकृत रुप से बिना सूचना के अनुपस्थित रहे. इसके बाद वहां के डीसी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सात फरवरी 2018 तक उपस्थित होने का निर्देश दिया. इस निर्देश के बावजूद सुबोध कुमार अनुपस्थित रहे. फिर 25 जुलाई 2018 को सुबोध कुमार को निलंबित किया गया. इसके बाद छह अगस्त 2018 को सुबोध कुमार ने अपना स्पष्टीकरण सौंपा. समीक्षा के बाद सरकार ने 31 जनवरी 2019 को उनके तीन वेतन वृद्धि पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया.

संतोष कुमार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही

पाकुड़िया के तत्कालीन बीडीओ संतोष कुमार गर्ग के खिलाफ सरकार ने विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया है. संतोष के खिलाफ मनरेगा योजना में अनियमितता बरतने, जांच दल को गुमराह करने, मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन करने और अभिलेख संधारण में गड़बड़ी करने का आरोप है. इसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश 31 जनवरी को जारी कर दिया गया है.

रुद्र प्रताप को निंदन

कोडरमा जयनगर के तत्कालीन बीडीओ रूद्र प्रताप के खिलाफ मनरेगा के तहत विभिन्न योजनाओं में लापरवाही बरतने का आरोप लगा. प्रताप के खिलाफ प्रतिवेदित आरोप , उनका स्पष्टीकरण और डीसी कोडरमा के मंतव्य की समीक्षा के बाद रूद्र प्रताप को निंदन का दंड अधिरोपित किया गया. कार्मिक ने 31 जनवरी को इसका आदेश जारी कर दिया. वहीं मधुपुर के तत्कालीन बीडीओ संतोष कुमार चौधरी के खिलाफ मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगा. चौधरी के स्पष्टीकरण के बाद भविष्य सचेत रहने की चेतावनी दी गई. कार्मिक ने इसका आदेश 31 जनवरी 2019 को जारी कर दिया.

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