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रांची में जमीन लूट पर नकेल कसने के लिये डीसी ने जारी किये चार निर्देश

Akshay Kumar Jha

Ranchi: रांची जिले में सरकारी जमीन और आदिवासी जमीन की लूट पर रोक लगाने के लिये डीसी ने चार निर्देश जारी किये हैं. डीसी महिमापत रे का मानना है कि चार काम करके प्रशासन को सरकारी व आदिवासी जमीनों की लूट पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी.

1.जीएम लैंड को प्रशासन अपने कब्जे में ले

ऐसी जमीन जो सरकारी गैर मजरुआ (जीएम लैंड) नेचर की है. जिस पर कोई जमाबंदी क्लेम नहीं है. कोई बिल्डिंग भी नहीं बनी है. उसे बिना देर किये प्रशासन को अपने कब्जे में लेना है.

ऐसा करने से ऐसी सरकारी जमीन जो प्रशासन के संज्ञान में नहीं है और जमीन माफिया उसे अपने कब्जे में करने की कोशिश में लगे हैं. उन पर लगाम लगेगी. यानि प्रशासन का मानना है कि ऐसा करने से जमीन लूट के नए मामले सामने नहीं आएंगे.

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2. जीएम लैंड पर बिना जमाबंदी बन गयी हो बिल्डिंग

प्रशासन का दूसरा निर्देश ऐसे जमीन को लेकर है, जो जीएम लैंड हैं. लेकिन, उसपर जमीन माफिया ने कब्जा कर बिल्डिंग बना दी है.

ऐसा अक्सर देखा जाता है कि माफिया धीरे-धीरे जमीन पर किसी तरह कब्जा करते हैं और फिर बिना जमाबंदी के ही भवन का निर्माण कर देते हैं.

निर्देश के मुताबिक ऐसे मामले में प्रशासन उस जमीन को खाली करायेगा. इसके लिए सरकारी प्रक्रिया अपनायी जाएगी और नोटिस दिया जाएगा. नोटिस तामील ना होने की सूरत में आगे की कार्रवाई की जायेगी.

3. अवैध जमाबंदी होगी रद्द

रांची प्रशासन का तीसरा निर्देश ऐसी जमीन को लेकर है, जिसमें माफिया ने सीओ कार्यालय की मदद से सरकारी जीएम लैंड की जमाबंदी करा ली हो.

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ऐसा देखा जाता है कि जमीन माफिया सरकारी जीएम लैंड की पहले जमाबंदी कराने की कोशिश करते हैं. इसके लिए सीओ कार्यालय से गैरकानूनी मदद ली जाती है.

एक बार जमाबंदी हो गयी तो, आराम से माफिया जमीन को अपने कब्जे में लेकर वहां बिल्डिंग बनाने का काम शुरू कर देते हैं. धीरे-धीरे वो जमीन किसी के नाम हो जाती है और प्रशासन कुछ नहीं कर पाता है. ऐसे सभी मामलों में जमीन की जमाबंदी को रद्द किया जाये.

4. अवैध जमाबंदी रद्द होगी और माफिया पर होगी कार्रवाई

इस निर्देश के तहत ऐसी जमीन जिसकी अवैध जमाबंदी करायी गयी है और उस पर बिल्डिंग भी बना दिया गया हो, उसमें सबसे पहले जमाबंदी रद्द की जायेगी.

जमाबंदी रद्द करने के बाद बिल्डिंग बनाने वाले को प्रशासन की तरफ से जमीन खाली करने का नोटिस दिया जाएगा. सरकारी प्रक्रिया को अपनाते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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संवाददाता की टिप्पणी

रांची प्रशासन ने जमीन बचाने की जो पहल की है, वह अपनी जगह तो ठीक है. लेकिन सवाल यह उठता है कि सरकारी जमीन के संबंध में ऐसे निर्देश या कानून पहले से नहीं थे. क्या सच में ये निर्देश कोई नयी पहल है. कोई नया कानून है.

और अगर ऐसे निर्देश या कानून पहले से थे तो पालन क्यों नहीं हो रहा था. जब कानून पहले से हैं, तो कैसे जमीन माफिया राज्य भर की जमीन को लूटने में कामयाब होते रहे.

सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट को लेकर राजनीति करने वालों पर ही कैसे इसका उल्लंघन करते हुए जमीन कब्जाने के मामले सामने आ रहे हैं.

कौन हैं इन जमीन माफियाओं को संरक्षण देने वाले. क्यों सरकार की तरफ से सिर्फ कार्रवाई करने का सब्जबाग दिखाया जाता रहा है. क्या सच में सरकार की नीयत अब जमीन लूट पर नकेल कसने की है.

अगर ऐसा है तो क्या रांची प्रशासन या सरकार अब जाग रही है. या अब अपनी मिलीभगत व नाकामियों को ढंकने की कोशिश कर रही है.

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