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स्थापना दिवस विशेष: कैसे लेबे झारखंड, लड़ के लेबौ झारखंड- जोश भरने वाले पुराने नारे के साथ ही निकलेगा वर्षगांठ की उदासी के आगे का रास्ता

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Rajesh Das

भगवान वीर बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. आज झारखंड अलग राज्य गठन के 18 वर्ष पूरे हो गए हैं. सत्ता-विपक्ष-प्यारी जनता हर कोई अपने-अपने तरीके से इस वर्षगांठ के उल्लास में शामिल है. किन्तु एक टीस शायद हर उस व्यक्ति के मन में जरूर है, जो इस राज्य से प्यार करता है कि झारखंड उस स्थान पर नहीं खड़ा है, जहां उसे होना चाहिए था.

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तो गलतियां कहां हुई हैं-

1. झारखंड में पिछले 18 वर्षों में वैसे लोग अरबपति हो गए हैं, जिन्हें इस राज्य से कोई प्रेम नहीं है.
2. राज्य के विकास का जन सहभागिता और विपक्ष की भागीदारी के साथ कोई साफ रोड मैप नहीं बन पाया है, जिसकी वजह से राज्य तरक्की नहीं कर पा रहा है.
3. राज्य के लोग ऊंची शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और पयर्टन के लिए बाहर का रुख करते है, जिसकी वजह से राज्य का धन बाहर चला जाता है और राज्य पिछड़ा नज़र आता है.
4. सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है. “सरकारी अफसर मालिक नहीं ये जनता के सेवक हैं” की अवधारणा को राज्य में बल दिए जाने की आवश्यकता है.
5. अगर सरकार एक बार में 1500 करोड़ रुपये खर्च कर गैरजरूरी बड़े भवन या सड़क बना सकती है, तो मात्र 400-500 करोड़ रुपये खर्च कर हमारे शहरों में ट्रैफिक सुधार, सुरक्षित साइकिल ट्रैक्स और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को भी संपादित कर सकती है. परंतु ये कार्य उनकी प्राथमिकता में नहीं है.
6. सरकारी तंत्र में निकम्मापन भी राज्य के अब तक पिछड़े होने की मूल वजहों में से एक है. कई विभागों में ऊंचे पदों में बैठे लोगों की योग्यता उद्वेलित करती है, वे तेज गति से बड़े शहरों से कदम ताल करने में सक्षम नहीं प्रतीत होते हैं, नतीजा योजनाएं पिछड़ती जाती है.

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7. छोटे राज्य और आर्थिक रूप से कमतर होने के बावजूद इस राज्य को बड़े राज्यों के साथ एक ही तराजू में तौल दिया गया है, जो सही नहीं है. व्यापारियों को किसी भी प्रकार की कोई अतिरिक्त छूट नहीं प्राप्त है, जिससे वे समय के साथ धीरे-धीरे आगे निकलते हुए, बड़े राज्यों का मुकाबला कर सकें.
8. सरकार की योजनाओं के कार्य आवंटन में स्थानीय लोगों और एजेंसियों को योग्यता से आधार पर प्राथमिकता प्रदान करने से वंचित रखा गया है. जिसकी वजह से बाहरी एजेंसियां ही अधिकतर लाभ प्राप्त कर रही है, जबकि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां स्थानीय लोग और एजेंसियां अच्छा कार्य कर सकती है.
9. राज्य में बिजली की हालत बहुत खराब है, जिसकी वजह से उद्यमी के उत्पाद की लागत बढ़ जा रही है. और वे दूसरे राज्यों में तैयार उत्पादों से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं.
10. राज्य के युवा गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं हासिल कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पिछड़ जा रहे हैं. उनके लिए सरकारी स्तर पर दीर्घ नियोजन हेतु किसी भी प्रकार के नवाचार का घोर अभाव दिखता है.

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11. राज्य में कृषि कार्य सब्सिस्टेंस पर है, जो मूलतः वर्षा आधारित और तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ है. एक फसल के बाद कई गांवों से लोग बड़े शहरों में काम की तलाश में पलायन करते हैं. जिसपर वर्षवार और माहवार माइग्रेशन डाटा जारी करने की जरूरत है, ताकि पता चले कि सरकारी कार्यों का असर कितना है.
12. झारखंड की सरकार स्टेटहुड डे को एक उत्सव के रूप में अब तक मना पाने में नाकाम रही है. शायद लोग इन आयोजनों से दिल से ना जुड़ सके हों. लोग बसों और गाड़ियों में भरकर सभा स्थल की भीड़ जरूर बढ़ाते होंगे, परंतु हर व्यक्ति इस उत्साह का हिस्सा बने, ऐसा अब तक नहीं हो पाया है. और यह सरकार के अच्छे आउटरिच और काम से ही संभव है.
देश के पूर्वोत्तर के कई ऐसे राज्य हैं जहां सामान्य मानवी स्व उत्साह से स्टेटहुड डेज़ में भाग लेते हैं, वहां इस अवसर पर भारी उत्साह का माहौल रहता है.
13. सबसे अंतिम और मुख्य बात कि राज्य में अच्छे उदाहरण स्थापित करने वाले अग्रिम पंक्ति के लोगों की भारी कमी है. वर्तमान के नेतागण बड़े लोग हैं, वे बड़ी गाड़ियों में काफिले के साथ चलते हैं, उनकी जीवनशैली प्रेरित नहीं करती है. इस वजह से वे जनता के दिलों में स्थायी जगह नहीं प्राप्त कर सके हैं. वे चुनाव जीतने के दृष्टिकोण मात्र के साथ मैदान में हैं, अतः उनकी दृष्टि युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा भी नहीं देती.

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इस लेख का अंत दैनिक प्रभात खबर में तीन दिन पूर्व छपे अभिनेता श्री नसीरुद्दीन शाह के इंटरव्यू के दौरान पूछे एक प्रश्न से करना चाहूंगा, उनसे उनके सिनेमा में 4 दशक रहने के बाबजूद सीधे-सादे जीवन शैली के बारे एक प्रश्न पूछा गया था-
“उनका जवाब था कि उन्होंने सिर्फ अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए फिल्मों में काम किये और पैसे कमाए हैं”

यही मूल संदेश है, झारखंड तुरंत आगे बढ़ जाएगा!!

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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