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महज समारोह तक ही सीमित न रहे स्थापना दिवस : योगेंद्र प्रताप

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Ranchi : झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती माना जानेवाला झारखंड आज अपनी 18वीं सालगिरह मना रहा है. कह सकते हैं कि अब हमारा झारखंड बालिग हो गया. झाविमो की ओर से सर्वप्रथम भगवान बिरसा को नमन. हर साल सरकार स्थापना दिवस तो धूमधाम से मनाती है, परंतु अफसोस कि यह आयोजन महज एक समारोह तक ही सीमित होकर रह जाता है. सरकार जो संकल्प लेती है, जिन योजनाओं की घोषणाएं या शिलान्यास करती है, वह धरातल पर कितनी उतर पाती हैं, पूर्व की घोषणाओं का कितना लाभ जनमानस को मिला है, सरकार को कभी उसकी भी समीक्षा कर लेनी चाहिए. 2014 के बाद भाजपा सरकार द्वारा 2015 से लेकर 2017, यानी तीन स्थापना दिवस के मौके पर की गयी घोषणाओं पर गौर करें, तो उनमें से अधिकतर घोषणाएं हवा-हवाई ही साबित हुई हैं. कुछ धरातल पर उतरीं भी, तो बाद में उसका हश्र भी बुरा ही हुआ. मुख्यमंत्री तो घोषणा इतनी कर चुके हैं कि अगर आधी भी सरजमीं पर उतर गयी होतीं, तो अब तक झारखंड समृद्ध हो गया होता. 2015 के स्थापना दिवस समारोह में सीएम ने कहा था कि जनता राम-सीता है और वह हनुमान हैं. वह जनता के सेवक हैं तथा जनता और उनके बीच दूरी नहीं होगी. अब जो सरकार अपने ही गृहनगर के दूसरे पायदान का दर्जा रखनेवाले एक मंत्री से चार वर्षों में दूरी नहीं पाट सके, जनता की दूरी भला क्या पाटेंगे.

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श्वेत पत्र जारी कर सरकार बताये किन निवेशकों ने राज्य में कितना निवेश किया

योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पिछले तीन स्थापना दिवस समारोहों के दौरान और भी कई बातें हुईं. झारखंड को निवेशकों की पहली पसंद बनाने, औद्योगिक घरानों के लिए एक लाख हेक्टेयर भूमि चिह्नित करने की बात हुई. सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि किन निवेशकों ने राज्य में कितने का निवेश किया है और किस उद्योग को कितनी जमीन आवंटित की गयी तथा इससे जनता को क्या लाभ हो रहा है. एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक स्मार्ट सड़क, केंद्र से 10000 करोड़ की सड़क निर्माण योजना, जोहार योजना, मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना, जनता के लिए लॉन्च किये 15 मोबाइल एप्स, कृषि रथ, बेरोजगारी व पलायन रोकने के लिए कौशल विकास योजना, 25 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर, 2017 गरीब कल्याण वर्ष, 37 नदियों के जलमार्ग में विकसित की योजना, 108 एंबुलेंस, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, हरमू फ्लाईओवर आदि तमाम योजनाओं का आज क्या हश्र है? मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा में 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज की बात है, परंतु यहां रिम्स में महज 50 रुपये के लिए मौत हो रही है. एंबुलेंस के बिना मरीज मर रहे हैं. किसान आत्महत्या कर रहे हैं. तमाम योजनाएं महज कागजी हैं, परंतु सरकार केवल अपनी पीठ खुद थपथपाने की आदी हो चुकी है. झाविमो का मानना है कि राज्य अलग होने की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब राज्य की जनता वास्तव में खुशहाल होगी, न कि केवल घोषणाओं से.

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