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34 साल कोर्ट में लड़ाई लड़ी, सेवानिवृत्त भी हो गये, अब मिलेगा राज्य कीट विज्ञान वेत्ता का वेतनमान

Ranchi : वर्ष 1988 में राज्य कीट विज्ञान वेत्ता के अतिरिक्त पद पर बहाल किये गये अखौरी टी शेखर सिन्हा को अदालत से 34 साल बाद न्याय मिला. झारखंड हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने प्रार्थी के पक्ष में फैसला दिया. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रार्थी को वर्ष 1988 में राज्य कीट विज्ञान वेत्ता के पद पर प्रतिनियुक्ति के बाद से उनके अंतिम वेतनमान के हिसाब से उन्हें मिलनेवाली राशि की गणना छह सप्ताह में करें. उसके तीन सप्ताह के भीतर उन्हें प्रोन्न्ति का लाभ देते हुए भगुतान सुनिश्चित करें. कोर्ट ने मामले को निष्पादित कर दिया. दरअसल, एकीकृत बिहार में प्रार्थी को अपने कार्य के अलावा अतिरिक्त प्रभार के रूप में राज्य कीट विज्ञान वेत्ता के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया था.

इस पद पर उनकी नियुक्ति को नियमित करने के लिए उन्होंने पटना हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. पटना हाइकोर्ट ने वर्ष 1996 में प्रार्थी के फैसला सुनाया. जिसमें कोर्ट ने सरकार को चार माह के भीतर इस पद पर नियुक्ति करने या कार्यरत कर्मी को प्रोन्नत करने का आदेश दिया था.

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इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि अगर प्रार्थी इस पद पर वर्ष 1988 से काम कर रहे हैं तो उनका वेतनमान बिहार सेवा संहिता के रूल 103 के तहत उन्हें विशेष वेतनमान दिया जाये. चार माह बाद भी उन्हें इस पद पर जब नियमित नहीं किया गया तो उन्होंने पटना हाइकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की. जिसे कोर्ट ने निष्पादित कर दिया.

झारखंड गठन के बाद राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर इनकी नियुक्ति राज्य कीट विज्ञान वेत्ता पद पर करने के लिए अनुशंसा कर दी. इसके बाद वर्ष 2010 में प्रार्थी सेवानिवृत हो गये.

वर्ष 2018 में उनकी ओर से झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर कर वेतनमान दिलाने की गुहार लगायी गयी थी. जिस पर हाइकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत शिकरवार ने पैरवी की.

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