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अगड़ी जातियां नाराज, पार्टी कैडर भी नहीं था खुश, इसलिए हारे : आरएसएस

सूत्रों के अनुसार इन तीन राज्यों के हारने के बाद भाजपा को खासा नुकसान हुआ है, जिसे आरएसएस ने हलके में नहीं लिया है.  तीनों राज्य भाजपा की मजबूत पकड़ वाले माने जाते हैं

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NewDelhi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आकलन के अनुसार पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हार वजह अगड़ी जातियों का गुस्सा, पार्टी कैडर में उदासीनता और कुछ सरकारी नीतियां रहीं. सूत्रों के अनुसार इन तीन राज्यों के हारने के बाद भाजपा को खासा नुकसान हुआ है, जिसे आरएसएस ने हलके में नहीं लिया है.  तीनों राज्य भाजपा की मजबूत पकड़ वाले माने जाते हैं. संघ के भरोसेमंद सूत्र ने इस संबंध में बताया कि एससी/एसटी एक्ट बहाल करने के लिए विधेयक पारित किये जाने के कारण  भाजपा से अगड़ी जातियां नाराज हो गयीं.  इससे मध्य प्रदेश में पार्टी की जीत की संभावनाओं का भारी नुकसान हुआ. पार्टी को सबसे ज्यादा नुकासन ग्वालियर-चंबल और मालवा क्षेत्र में हुआ.  ग्वालियर-चंबल क्षेत्र मे इस साल आठ लोगों की मौत के बाद दलित संगठनों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए थे.  यहां की कुल 34 सीटों में से पार्टी को महज सात सीटों पर जीत मिल सकी, जबकि  2013 में आंकड़ा 21 था.

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 एससी/एसटी बिल पास होने से ओबीसी वोटर नाराज हो गया

एससी/एसटी बिल पास होने की वजह से छत्तीसगढ़ में भी ओबीसी वोटर नाराज हो गया.  आरएसएस को फीडबैक में पता चला कि मतदान में नोटा का बटन दबाने की वजह से भी पार्टी को खासा नुकसान हुआ.  हालांकि नोटा बटन दबाने वाले सभी लोगों को पार्टी से मोहभंग होने वाला करार नहीं दिया जा सकता.  बता दें कि मध्य प्रदेश में नोटा की वजह से राज्य की कई सीटें प्रभावित हुईं . हालांकि दिल्ली में बैठे  भाजपा के आला नेताओं का मानना है कि चुनाव में एंटी इनकम्बैंसी फैक्टर की वजह से हार हुई. मगर  नेता मानते हैं कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में अच्छी टक्कर दी.  आरएसएस के मूल्यांकन में यह भी देखा गया कि इन तीनों राज्यों में भाजपा के मजबूत मुख्यमंत्री उम्मीदवार थे .

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छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर भी नहीं थी .  सूत्रों के अनुसार ग्रामीण संकट, जीएसटी अमल में लाने का तरीका, एससी/एसटी एक्ट आदि कुछ मुद्दे थे,  जिसे स्थानीय नेताओं ने नजरअंदाज किया. यह पार्टी को भारी पड़ा.

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