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पीएम मोदी को “आत्मनिर्भर भारत” पर RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेताया

राजन भारतीय विद्या भवन के एसपी जैन इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (एसपी जेआईएमआर) के सेंटर फार फाइनेंसियल स्टडीज द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे

Mumbai  : रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने पीएम मोदी को आत्मनिर्भर भारत  पर सावधान किया. बुधवार को रघुराम राजन ने सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने पर सवाल उठाये. कहा कि देश में पहले भी ऐसे प्रयास किये गये, पर असफल रहे. राजन यहां भारतीय विद्या भवन के एसपी जैन इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (एसपी जेआईएमआर) के सेंटर फार फाइनेंसियल स्टडीज द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे.

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यह रास्ता हम पहले भी अपना चुके हैं, यह असफल रहा है

राजन ने कहा, यदि इसमें (आत्मनिर्भर भारत पहल) इस बात पर जोर है कि शुल्कों को लगाकर आयात का प्रतिस्थापन तैयार किया जायेगा, तो मेरा मानना है कि यह वह रास्ता है जिसे हम पहले भी अपना चुके हैं और यह असफल रहा है. मैं इस रास्ते पर आगे बढ़ने को लेकर सावधान करना चाहूंगा.

उन्होंने कहा कि देश के निर्यातकों को अपने निर्यात को सस्ता रखने के लिए आयात करने की जरूरत होती है ताकि उस आयातित माल का इस्तेमाल निर्यात में किया जा सके. चीन एक निर्यात ताकत के तौर पर ऐसे ही उभरा है. वह बाहर से विभिन्न सामानों को आयात करता है उनकी एसेम्बली करता है और फिर आगे निर्यात करता है.

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 यह खुली चेक बुक जारी करने का समय नहीं है

‘‘निर्यात के लिए आपको आयात करना होगा. ऊंचा शुल्क मत लगाइये बल्कि भारत में उत्पादन के लिए बेहतर परिवेश तैयार कीजिए. राजन ने कहा कि सरकार द्वारा लक्षित खर्च दीर्घकाल में फलदायी हो सकता है. मेरा मानना है कि पूरे खर्च पर नजर रखनी चाहिए और सावधान रहना चाहिए. यह खुली चेक बुक जारी करने का समय नहीं है. लेकिन ऐसे में किसी लक्ष्य को लेकर किया जाने वाला खर्च यदि बुद्धिमानी और सावधानी के साथ किया जाता है तो यह आपको बेहतर नतीजे दे सकता है.

विपक्षी दलों के पास कुछ बेहतर सुझाव हो सकते हैं

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि वास्तविक समस्या की पहचान कर सुधारों को आगे बढ़ाना सही है लेकिन इस प्रक्रिया में सभी पक्षों की सहमति की जरूरत है. लोगों, आलोचकों, विपक्षी दलों के पास कुछ बेहतर सुझाव हो सकते हैं आप यदि उनमें अधिक सहमति बनायेंगे तो आपके सुधार अधिक प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगे. मैं यह नहीं कर रहा हूं कि मुद्दों पर लंबे समय तक चर्चा होते रहनी चाहिए. लेकिन लोकतंत्र में यह महतवपूर्ण है कि आम सहमति बनायी जाये.

राजन ने कहा कि ढांचागत सुविधाओं के विकास में एक सबसे बड़ी रुकावट भूमि अधिग्रहण की है, इसमें कुछ तकनीकी बदलावों की आवश्यकता है. भूमि का बेहतर रिकार्ड और स्पष्ट स्वामित्व होना चाहिए. ‘‘कुछ राज्यों ने इस दिशा में पहल की लेकिन हमें पूरे देश में यह करने की जरूरत है.

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