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जमशेदपुर के पूर्व सांसद ले रहे अपनी आइएएस पत्नी से तलाक, मुंबई फैमिली कोर्ट में दी अरजी

Jamshedpur :  साल 1996 में जमशेदपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने और टेलीविजन के पौराणिक शो ‘महाभारत’ में कृष्ण की भूमिका से हर किसी के दिलों पर छाप छोड़ने वाले अभिनेता नीतीश भारद्वाज ने अपनी शादी तोड़ने का फैसला लिया है. वह अपनी आइएस पत्नी  स्मिता से तलाक लेने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश निवासी नीतीश जहां पेशे से एक्टर हैं, तो वहीं उनके पत्नी स्मिता आईएएस अधिकारी हैं. स्मिता अपनी जुड़वां बेटियों के साथ मध्यप्रदेश के इंदौर में रहती हैं.

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सांसद बनने के बाद कभी लौटकर जमशेदपुर नहीं आये

26 वर्ष पहले की बात है. बीआर चोपड़ा के धारावाहिक महाभारत की धूम थी.  भगवान कृष्ण का किरदार निभा रहे नीतीश भारद्वाज घर-घर में लोकप्रिय हो चुके थे. लोकसभा के चुनाव हो रहे थे. भाजपा ने उन्हें जमशेदपुर के चुनावी रण में उतार दिया. नीतीश भारद्वाज ने जैसे ही लौहनगरी में कदम रखा ‘भक्तों’ ने उनका भव्य स्वागत किया. प्रचार के लिए निकले, तो सोनारी से बिरसानगर तक उन्हें देखने की होड़ मच गयी. महिलाएं उन्हें देखने के लिए आतुर थीं. नीतीश भारद्वाज ने तब के दिग्गज नेता जनता दल प्रत्याशी इंदर सिंह नामधारी को 55,137 वोटों से हरा दिया. नीतीश भारद्वाज को दो लाख 21 हजार 702 वोट मिले थे. यह कुल वोटों का 59.2 फीसदी हिस्सा था.  रणक्षेत्र से जीत के बाद भगवान कृष्ण, जो हस्तिनापुर (दिल्ली) को निकले कि दोबारा जमशेदपुर नहीं लौटे.  भक्त रूपी मतदाता पलक पांवड़े बिछाये उनके आने का इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं आये.

तलाक कभी-कभी मौत से ज्यादा दर्दनाक हो सकता है

शादी के 12 साल बाद नीतीश भारद्वाज ने पत्नी स्मिता के साथ तलाक फाइल किया है. इसकी जानकारी नीतीश भारद्वाज ने खुद ही अपने फैंस तक पहुंचायी है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने तलाक के बारे में बात करते हुए नीतीश का कहना है कि तलाक कभी-कभी मौत से ज्यादा दर्दनाक हो सकता है. नीतीश ने बताया कि मामला मुंबई में फैमिली कोर्ट में दायर किया गया है. बताया जाता है कि दोनों ने अपने रिश्तों को आपसी सहमति से खत्म करने का फैसला लिया है, लेकिन वो खुद को अनलकी मानते हैं. उन्होंने कहा, “एक परिवार के टूटने का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। इसलिए माता-पिता की ये जिम्मेदारी बनती है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके इस फैसले से बच्चों पर कम से कम प्रभाव पड़े और बच्चों को नुकसान ना पहुंचे.”

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