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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने किया सरेंडर, भेजे गये होटवार जेल

जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर कोर्ट ने 4 अप्रैल 2019 को जमानत रद्द कर दिया था, जिसके बाद साव ने आज रांची में सरेंडर कर दिया. 

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Ranchi :झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने सोमवार को रांची के सिविल कोर्ट में सरेंडर कर दिया. जिसके बाद उन्हें रांची में स्थित होटवार जेल भेज दिया गया. दरअसल  दिसंबर, 2017 में योगेंद्र साव और उनकी पत्नी विधायक निर्मला देवी को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी.मानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर कोर्ट ने 4 अप्रैल 2019 को जमानत रद्द कर दिया था, जिसके बाद साव ने आज रांची में सरेंडर कर दिया. 

दंगा भड़काने और भीड़ को उकसाने के आरोपी योगेंद्र साव को कोर्ट ने तड़ी पार कर दिया था और भोपाल में रहने का आदेश दिया था. लेकिन कोर्ट ने पाया कि आदेश के बावजूद वो झारखंड आए थे.

वहीं योगेंद्र साव और उनकी विधायक पत्नी पर हजारीबाग में चल रहे मुकदमों को सुप्रीम कोर्ट ने रांची ट्रांसफर करने का भी आदेश दिया था.

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18 मुकदमे रांची कोर्ट स्थानांतरित किया गया

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी विधायक पत्नी निर्मला देवी के 18 मुकदमे हजारीबाग कोर्ट से रांची स्थानांतरित कर दिया. दरअसल दिसंबर 2017 में जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने दोनों को सशर्त जमानत दी थी.

कोर्ट ने कहा था कि दोनों लोग झारखंड से बाहर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहेंगे. साथ ही शर्त लगायी थी कि वह गवाहों से किसी सूरत में संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे. इन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा कराने के आदेश सुनाया गया था.

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सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का लगा था आरोप

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी पर हजारीबाग जिला के बड़कागांव में एनटीपीसी के प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध करने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने एवं सुरक्षा बलों पर भीड़ से हमला कराने का आरोप है.

दरअसल बड़कागांव के ढेंगा गांव में एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग प्रोजेक्ट के विरोध में 14 अगस्त, 2015 को पुलिस के साथ ग्रामीणों की झड़प हो गयी थी. इस मामले में योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सशर्त जमानत

मिली जानकारी के अनुसार श्री योगेन्द्र साव ने हाइकोर्ट में अपील की और उन्हें वहां से जमानत मिला था. झारखंड सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किया था. सरकार ने कहा कि झारखंड हाइकोर्ट ने केस डायरी देखे बगैर ही योगेंद्र साव और उनकी पत्नी को जमानत दे दी.

झारखंड सरकार की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने श्री साव और निर्मला देवी की जमानत रद्द कर दी थी. साथ ही झारखंड हाइकोर्ट को आदेश दिया कि वह फिर से मामले की सुनवाई करे.

दोबारा सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. हाइकोर्ट के आदेश को योगेंद्र साव और उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

दिसंबर, 2017 में सुप्रीम कोर्ट से इन्हें सशर्त जमानत मिली थी. जिसे कोर्ट ने 4 अप्रैल को रद्द कर दिया था.

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