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पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव एक और मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी

Ranchi: आम्रपाली कोयला परियोजना टंडवा के खदान क्षेत्र में अनाधिकार रूप से प्रवेश कर खदान का कोयला एवं ओबी उत्पादन सह ढुलाई कार्य जबर्दस्ती बाधित करने से जुड़े एक मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव समेत 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बुधवार को अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने बरी कर दिया है. बरी होनेवालों में चार महिला भी शामिल हैं. अदालत ने गवाहों को लाने के लिए लंबा समय दिया था. बावजूद एक भी गवाह अदालत तक नहीं पहुंचा. सुनवाई के दौरान योगेंद्र साव को जेल से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था. वह लगातार तीन मामलों में बरी हुए. घटना को लेकर आम्रपाली परियोजना खदान क्षेत्र में तैनात वरीय सुरक्षा निरीक्षक चक्रपाणि घोष ने 19 जून 2015 को योगेंद्र साव समेत 23 के खिलाफ नामजद प्राथमिकी(कांड संख्या 93/2015) टंडवा (चतरा) थाना में दर्ज कराई थी. जिसमें कहा गया था कि लगभग 250 की संख्या में ग्रामीण खदान क्षेत्र में पारंपरिक हथियार के साथ प्रवेश किया. खदान में लगे वाहन को क्षतिग्रस्त किया. कार्यालय में तोड़फोड़ की. जिससे कोयला ढलाई का कार्य पूरी तरह से बाधित रहा. इससे सरकार को लाखों रुपये का नुससान उठाना पड़ा.

मामले से बरी होनेवालों में योगेंद्र साव, आशुतोष मिश्रा, बिनोद बिहारी पासवान, महेश महतो, संजय साव, राजेंद्र साव, देव नारायण, भुनेश्वर साव, जमानी देवी, जिरवा देवी, सुनीता देवी, सुशीला देवी, प्रेम उरांव, रंजन नारायण दास, कुंदन पासवान, राजेंद्र यादव, लाल किशुन यादव, धीरेंद्र प्रजापति, प्रवीण मिश्रा, सुरेश साव व मुकेश ठाकुर शामिल है.

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