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पूर्व सरकार ने रोकी विनिर्माण कार्य की फंडिंग, अब लॉकडाउन में इसका खामियाजा भुगत रहे रियल एस्टेट

आचार संहिता लागू होने के पहले ही विनिर्माण कार्य का रूका है भुगतान, आठ महीने हो चुके

60 फीसदी सड़क, भवन आदि निर्माण कार्य पूर्व फंडिंग के कारण रूका

भुगतान नहीं होने पर मजदूरों को काम मिलने मे हो सकती है परेशानी

Chhaya

Ranchi: कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन के कारण हर सेक्टर प्रभावित हुआ है. वहीं झारखंड में उद्योगों के खुलने की अनुमति लॉकडाउन 2.0 के वक्त से दी गयी. जिसके तहत विनिमार्ण कार्य भी राज्य में शुरू किया गया.

अब जब लॉकडाउन 3.0 समाप्त होने वाला है. बावजूद इसके अब तक राज्य में विनिमार्ण कार्य सही से शुरू नहीं हो सका है. इसका मुख्य कारण है पूर्व सरकार की ओर से अलग-अलग योजनाओं के लिये बिल्डिरों से लिये काम का भुगतान नहीं करना. हालांकि कुछ और प्रमुख समस्याएं भी है.

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लेकिन अधिकांश विनिमार्ण कार्य पूंजी की कमी के कारण रूका है. कुछ बिल्डिरों से बात करने से जानकारी मिली की पूर्व सरकार ने कई योजनाओं के लिये बिल्डिरों से काम लिया. लेकिन इसके बाद राज्य में आचार संहिता लागू हुई. और भुगतान जस का तस रह गया. खुद फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉर्मस एडं इडंस्ट्रीज के अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने बताया कि बिल्डिरों की ओर से लगातार सरकारी भुगतान रोके जानी की समस्या सामने आ रही है. अलग-अलग विभागों से बिल्डिरों को काम मिला था. भुगतान को लेकर वार्ता की जा रही है.

60 प्रतिशत काम रूका है

भले ही लॉकडाउन में विनिमार्ण कार्य में छूट दी गयी हो. इसके बाद भी 60 प्रतिशत निमार्ण कार्य राज्य में रूके हैं. कुछ बिल्डिरों ने बताया कि एक तो पहले से विभागों में भुगतान रूका है. कई इलाकों में निमार्ण कार्य भी रूके है. ऐसे में भुगतान नहीं होने से और पहले से लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों आदि को भुगतान करने से, पूंजी की समस्या हो गयी है. जिससे काम फिर से चालू नहीं हो पा रहा है.

हालांकि राज्य में कुछ निमार्ण कार्य ऐसे भी होते है जो केंद्र और राज्य के अंशदान से होते हैं. जिनका भुगतान राज्य सरकार की ओर से ही किया जाता है. लेकिन चुनाव के पहले से स्थिति ये है कि बिल्डिरों को भुगतान नहीं किया गया. जबकि लॉकडाउन के बाद से राज्य में 550 के लगभग रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पेंडिंग है.

वहीं निमार्ण कार्य के लिये कच्चा माल जरूरी है. जिसके लिये परिवहन व्यवस्था होनी चाहिये. लेकिन अभी वो भी उपलब्ध नहीं है.

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मजदूर तो आ रहे लेकिन काम नहीं मिल पायेगा

कुणाल आजमानी ने बताया कि राज्य सरकार अलग-अलग राज्यों से मजदूरों को ला रही है. अब तक हजारों मजदूर आ चुके हैं. राज्य सरकार इन्हें काम देने की योजना भी बना रही है. लेकिन काम तभी मिलेगा, जब व्यवसायी काम शुरू करेंगे.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिकांश संख्या में मजदूर विनिमार्ण कार्य में लगे रहते हैं. अब पूंजी नहीं रहेगी तो कॉन्ट्रैक्टर्स काम कैसे करेंगे. एक तो पहले से आर्थिक मंदी के दौरान काम ठप था, ऊपर से अब लॉकडाउन. इन्होंने बताया कि सरकारी रियल एस्टेट वर्क के तहत ग्रामीण सड़क निर्माण जो राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कराया जाता है. भवन निमार्ण, रेलवे ट्रैक, हाईवे निमार्ण जो पूरी तरह से केंद्र सरकार के निर्देश पर होता है आदि काम है. इनमें से कुछ कामों में राज्य और केंद्र सरकार शेयर में काम कराते है.

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