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झरिया में पेयजल संकट पर पूर्व जिला भाजपाध्यक्ष हरि प्रकाश लाटा ने FB पर लिखा सीएम के नाम खुला पत्र

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Dhanbad : धनबाद में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है. अधिकारी लोगों का फोन तक नहीं उठाते. मुख्यमंत्री रघुवर दास धनबाद के साथ उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रहे हैं. इसलिए कि यहां के एक जनप्रतिनिधि को छोड़ सभी पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के खेमे के हैं. धनबाद नगर निगम के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ही सिर्फ मुख्यमंत्री रघुवर दास के खेमे के हैं. धनबाद भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी मूवमेंट में सक्रिय भूमिका के लिए बिहार-झारखंड में अपनी विशिष्ठ पहचान रखनेवाले हरिप्रकाश लाटा ने भाजपा के एक कार्यकर्ता के रूप में facebook  पर झारखंड के मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र महापर्व छठ के प्रथम अर्घ्य के दिन लिखा. इसे रात 8:12 बजे तक 80 लोगों ने लाइक किया. 60 लोगों ने इस पर कमेंट किए, उसमें से प्रमुख का उल्लेख ऊपर किया गया है. इस पोस्ट को 8 लोगों ने शेयर किया.

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लाटा के पत्र में क्या लिखा है

माननीय मुख्यमंत्री जी

झारखंड सरकार

बहुत ही दुख और पीड़ा के साथ यह खुला पत्र लिखने को मजबूर हूं. झरिया की जनता पिछले छह महीने से पानी के अभाव से त्रस्त हैं. पवित्र छठ पर्व पर भी यही स्थिति है. किसी तरह से लोग कुछ स्थानों पर व्यक्तिगत प्रयास से कुछ पानी की व्यवस्था कर छठ पर्व कर रहे हैं.

पता नहीं कितनी बड़ी खराबी आ गयी है कि जल वितरण व्यवस्था छह महीने से न तो माडा और न ही नगर निगम सुचारू कर पाया है. छठ पर्व तो सुबह अर्घ्य के साथ संपन्न हो जाएगा. आग्रह है कि लंबे समय से जल संकट झेल रही जनता को कष्ट से निजात दिलाने के लिए त्वरित कदम उठाएं. स्थानीय जन प्रतिनिधि भी आपको इस समस्या की जानकारी देते रहे हैं.

आपको छठ की हार्दिक शुभकामनाएं

आपका ही

हरिप्रकाश लाटा

भाजपा कार्यकर्ता

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झरिया में जल संकट का विकराल रूप

यहां की साढ़े तीन लाख जनता पिछले छह माह से जल संकट झेलने को विवश हैं. नियमित जलापूर्ति नहीं होने की वजह से यहां के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में पहुत परेशानी झेलना पड़ रहा है. कभी झमाडा कर्मियों के बकाया राशि के भुगतान की मांग पर हड़ताल तो कभी जामाडोबा जलागार में मोटर की खराबी के कारण झरिया की जनता पानी को तरसती रही है. बरसात के दौरान मोटर पानी में डूब जाने के कारण 15 दिनों तक जलापूर्ति ठप रही. इसके बाद कुछ ही दिनों की जलापूर्ति के बाद फिर से पाइप मरम्मत के नाम पर जलापूर्ति रोक दी गयी थी.

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पानी की कमी ने त्योहारों का भी मजा किया किरकिरा

जलापूर्ति ठप रहने से पानी की कमी ने त्योहार का मजा किरकिरा करने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी. दीपावली के पहले भी पाइप मरम्मत के नाम पर चार दिनों तक जलापूर्ति बंद रही, जिससे सफाई कार्य में लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा. जब महापर्व छठ था और है कठिन नियमों के साथ-साथ शुद्धता जरूरी थी, तब भी इसके ठीक पहले ही दो दिन तक जलापूर्ति नहीं हुई. जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

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जनता के सड़क पर उतरने के बावजूद स्थिति में नहीं हुआ कोई सुधार !

झरिया की जनता कई बार बर्तन और डब्बा लेकर सड़क पर जलापूर्ति कि व्यवस्था को सुधारने को लेकर प्रदर्शन भी कर चुकी है. महिलाएं तक सड़क पर उतर चुकी हैं. यहां तक कि कई नेतागण भी कई बार पानी की व्यवस्था सुधारने को लेकर हो हल्ला मचा चुके हैं. फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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आधी रात को ही कर दी जाती है जलापूर्ति

पानी नियमित रूप से नहीं मिलने से तो जनता त्रस्त है ही, ऊपर से कभी नल खुलता भी है तो इसका कोई समय नहीं है. झरिया के कई इलाक़ों में रात को 1 बजे तो कभी 2 या 3 बजे ही जलापूर्ति कर दी जाती. जबकि सुबह 5-6 बजते ही नल बंद हो जाता है. इस कारण लोगों को आधी रात को ही जागना पड़ता है. इसके अलावा किसी इलाके में कहीं शाम में तो कभी दोपहर में ही जलापूर्ति कर दी जाती है. जिससे लोगों को सब काम छोड़कर पानी आने का इंतजार करना पड़ता है.

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पानी भरने के लिये रोजाना होता रहता है झगड़ा

पानी की इतनी किल्लत है कि जब नल खुलता है तो पानी भरने वालों की नल पर लंबी लाइन लग जाती है. नलों पर डब्बे और बर्तन की भरमार लगी होती है. इसके बाद पानी भरने की होड़ में लोग अक्सर तू, तू-मैं, मैं करने लगते हैं. कई बार झगड़े भी होते हैं.

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कुएं के आसपास उमड़े लोग

छठ के दिन भी झरिया में जलापूर्ति नहीं हुई है, जिससे छठ करने वालो को नहाने- प्रसाद बनाने के लिए पानी नहीं मिल पाया. इसके कारण लोगों को पानी के लिए इधर-उधर मशक्कत करनी पड़ी. झरिया कतरास मोड़ स्थित कुआं के पास भी डब्बा- डेकची लेकर आसपास के लोगों की पानी के लिये काफी भीड़ लग हुई थी. दूर- दूर से लोग साइकिल लेकर आये थे और पानी के लिए लंबी कतार लगाये हुए थे.

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