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पूर्व CJI ने दी लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की सलाह, मॉब लिंचिंग को बताया कानून की विफलता

मॉब लिंचिंग कानून एवं व्यवस्था की पूर्ण विफलता

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NewDelhi: देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने उच्चतम न्यायालय में लाए जाने वाले मुकदमों के लिए सरकार के एक लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की हिमायत की है. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ठाकुर ने कहा कि किसी मामले को आगे बढ़ाना है या नहीं,  इस पर कोई अधिकारी वस्तुनिष्ठ निर्णय लेने से डरता है क्योंकि आगे चल कर इसके लिए उससे पूछताछ हो सकती है.

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उन्होंने पूर्व कानून मंत्री एम वीरप्पा मोइली की किताब ‘द व्हील ऑफ जस्टिस’ के विमोचन के दौरान ये बातें कही.  पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लाये जानेवाले केस के लिए सरकार के एक लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की नसीहत दी.

मॉब लिचिंग कानून एवं व्यवस्था की पूर्ण विफलता

पूर्व न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करना कानून एवं व्यवस्था की पूर्ण विफलता है.  न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि न्यायपालिका ही देश में कानून का शासन सुनिश्चित करती है और यह भी सुनिश्चित करती है कि कोई भी निरंकुश व्यक्ति इस पर शासन नहीं कर पाए.

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पूर्व कानून मंत्री वीरप्पा मोइली की किताब ‘द व्हील ऑफ जस्टिस’ के विमोचन के मौके पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि अपराध करने वाले व्यक्ति पर कानून के मुताबिक मुकदमा चलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को भी उच्चतम न्यायालय तक निष्पक्ष तरीके से सुनवाई का मौका मिला. उसे भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार देने के लिए नहीं छोड़ दिया गया. पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करना कानून एवं व्यवस्था की पूरी तरह से नाकामी है.

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