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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकारी खर्च से चुनाव कराने की वकालत की, कॉरपोरेट चंदे पर लगे पाबंदी

कृष्णमूर्ति ने कहा कि कॉरपोरेट चंदे के माध्यम से धन जुटाने का अपारदर्शी तरीका चिंता पैदा करने वाला है.  जब कंपनियां राजनीतिक दलों को चंदा देती हैं तो इससे एक गिरोह बन जाता है.

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Hyderabad : आम चुनाव का खर्च सरकारी कोष से किया जाना चाहिए.  पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने मंगलवार को चुनावों के लिए सरकारी कोष से खर्च करने के लिए राष्ट्रीय चुनाव निधि बनाने की बात कही.  इस क्रम में  कहा कि निधि में चंदे के माध्यम से धन जमा हो.  बता दें कि कृष्णमूर्ति ने चुनाव सुधारों के तहत राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट चंदे पर पाबंदी का समर्थन किया. मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में 2004 में आम चुनाव कराने वाले कृष्णमूर्ति ने एक संगठन की इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी कि हाल के लोकसभा चुनाव में करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये.

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हालांकि उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ने से खर्च बढ़ सकता है. कृष्णमूर्ति ने कहा कि कॉरपोरेट चंदे के माध्यम से धन जुटाने का अपारदर्शी तरीका चिंता पैदा करने वाला है.  जब कंपनियां राजनीतिक दलों को चंदा देती हैं तो इससे एक गिरोह बन जाता है. इसके बजाय लोग एक राष्ट्रीय चुनाव निधि में चंदा दे सकते हैं और अपने दान पर शत प्रतिशत कर छूट हासिल कर सकते हैं.

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किसी राजनीतिक दल ने सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने सुझाव दिया, चुनाव आयोग इस धन का इस्तेमाल सभी राजनीतिक दलों के परामर्श से बनाये गये दिशानिर्देशों के आधार पर करेगा.उन्होंने कहा, सरकारी खर्च से चुनाव एकमात्र तरीका है. राजनीतिक दलों को चंदा देने में कॉरपोरेट शामिल नहीं होने चाहिए.’ स्क्रॉल डॉट इन के अनुसार, 2004 के आम चुनाव को याद करते हुए कृष्णमूर्ति ने कहा कि उन्होंने सरकार को चुनाव सुधार से संबंधित लगभग 20 सुझाव दिये थे.

उन्होंने दुख जताते हुए कहा, कई अन्य संस्थाओं के साथ कानून मंत्रालय ने भी इस मामले पर अपना सुझाव दिया था और सिस्टम में खामियों की ओर ध्यान दिलाया था. हालांकि, किसी राजनीतिक दल ने उन सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया.उन्होंने कहा, व्यक्तिगत रूप से राजनेता चुनाव प्रणाली से खुश नहीं है, लेकिन एक समूह में वे यथास्थित से खुश नजर आते हैं. ईवीएम को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि बिना वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल सिस्टम (वीवीपीएटी) के भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें विश्वसनीय हैं.

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