JamshedpurJharkhand

हमें माफ कर देना सुकू ! तुम्हारे ब्लड कैंसर से ज्यादा गंभीर बीमारी हमारे सिस्टम में है, तुम्हें कौन बचाता

ब्लड कैंसर से पीड़ित 11 साल के सबर बालक की, रिम्स तक में भर्ती नहीं करा पाये माता-पिता, ग्रामीणों के सहयोग से हुआ अंतिम संस्कार

11 साल का सुकू सबर अपने पिता बुद्धेश्वर सबर का सबसे अच्छा बेटा था. शनिवार को उसने  ब्लड कैंसर के कारण दम तोड़ दिया. उसकी मौत बीमारी से ज्यादा व्यवस्था की वजह से हुई. वह बच सकता था अगर आदिम जनजातियों को मिलनेवाली सुविधाएं उसके परिवार को मिलतीं. अगर  उसे असाध्य बीमारी के इलाज की योजना का लाभ दिलाने कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि आगे आता. मगर ऐसा हुआ नहीं. हुआ यह कि सुकू का पिता बुद्धेश्वर उसे रांची के रिम्स में भी भर्ती नहीं करा सका. लाचार मां-बाप की आंखों के सामने बीमार बेटे ने तिल-तिल कर प्राण त्याग दिये. इस समाज को शर्मिंदा होना चाहिए. हमें सुकू से माफी मांगनी चाहिए. क्योंकि सुकू का ब्लड कैंसर शायद ठीक हो जाता, लेकिन उससे बड़ी बीमारी तो हमारे सिस्टम में बैठी है. वह उसे कैसे ठीक होने देती. उसे तो मरना ही था.

Ghatshia : आदिवासियों के लिए सरकारी योजनाएं बनती तो हैं, लेकिन जरूरतमंदों को उनका लाभ कितना मिल पाता है, इसे साबित करने को 11 साल के सबर बालक सुकू सबर की मौत ही काफी है. घटशिला प्रखंड की बड़ाखुर्शी पंचायत की दारिसाई स्थित सबर बस्ती में रहनेवाले बुधेश्वर सबर के 11 साल के बेटा सुकू सबर ने शनिवार तड़के 3 बजे दम तोड़ दिया. वह ब्लड कैंसर से पीड़ित था. सुकू पैरागुरी मध्य विद्यालय में छठी कक्षा का छात्र था. डॉक्टरों के अनुसार उसे पिछले एक साल से ब्लड कैंसर था. शरीर में खून बनना बंद हो गया था. सोने के दौरान उसके मुंह से लार के साथ खून आता था, लेकिन गरीब बुधेश्वर अपने कलेजे के टुकड़े का इलाज नहीं करा पाया. जब कभी बेटे की तबीयत ज्यादा खराब होती, वह उसे लेकर घाटशिला अनुमंडल अस्पताल जाता, वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए एमजीएम रेफर कर दिया जाता था. करीब 4-5 बार ऐसा हुआ. लेकिन जो इलाज मासूम सुकू को मिलना चाहिए था, वह एमजीएम में उपलब्ध नहीं होने से वह और बीमार होता गया. पिछले शनिवार को तबीयत फिर बिगड़ी तो माता-पिता उसे एमजीएम लेकर गये. वहां डॉक्टरों ने उसे  रांची स्थित रिम्स के लिए रेफर कर दिया, रिम्स के बारे में किसी जानकारी के अभाव में परिजन बच्चे को लेकर आ गये. एक हफ्ते बाद शनिवार को उसने दम तोड़ दिया. बच्चे की मौत की सूचना मिलने पर मुखिया राधिका सिंह के पति हरिपद सिंह दारिसाई सबर बस्ती पहुंचे.  ग्रामीणों के सहयोग से सुकू का अंतिम संस्कार शनिवार को ही कर दिया गया. सुकू को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी थी. इलाज के अभाव में महज 11 वर्ष के आयु में सुकू सबर काल के गाल में समा गया.

आर्थिक तंगी नहीं होती, तो शायद बेटे को बचा पाता

Catalyst IAS
ram janam hospital

बेटे की मौत के बाद पिता बुधेश्वर एवं मां निसुदा सबर का रो-रोकर बुरा हाल है. बस्ती में शोक की लहर है. बुधेश्वर कहता है कि पैसों के अभाव में छोटे बेटे सुकू का समुचित इलाज नहीं कर पाया. अगर पैसा रहता, तो बेटे को बेहतर इलाज दे पाता. सुकू मेरा सबसे अच्छा बेटा था. रिम्स में ले जाने के लिए कोई आगे नहीं आया. सरकारी बाबू लोगों ने भी संज्ञान नहीं लिया. कोई मदद नहीं मिली. काश मेरे पास आर्थिक तंगी नहीं होती, तो शायद बेटे को बचा पाता.

The Royal’s
Sanjeevani

इसे भी पढ़ें – गढ़वा: नवविवाहिता की संदेहास्पद मौत पर बिफरे पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

Related Articles

Back to top button