lok sabha election 2019

राज्य की एक तिहाई आबादी के लिए वन संसाधन और वन अधिकार एक प्रमुख मुद्दा

Ranchi: राज्य में लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से अभियान चला रहे हैं. अब जनता भी चाहती है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक दलों के समक्ष लाने की कोशिश की जाये, जो वास्तव में लोगों और राज्य से जुड़ी हैं. उक्त बातें झारखंड वनाधिकार मंच के सुधीर पाल ने कहीं. वे मंच की ओर से आयोजित वन संसाधनों पर सामुदायिक अधिकार विषय पर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे. इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि मंच की ओर से भाजपा समेत महागठबंधन और अन्य राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों का गहन अध्ययन किया. जिससे जानकारी हुई कि कई पार्टियों ने तो वनाधिकार विषय को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी ने इस विषय को अपने एजेंडों में शामिल नहीं किया है. जबकि राज्य के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण विषय है.

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लगभग 77 लाख मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय

इस दौरान उन्होंने कहा कि मंच की ओर से जो सर्वे किये गये हैं, उससे जानकारी होती है कि राज्य की कुल आबादी की लगभग एक तिहाई जनसंख्या वन अधिकार और भूमि सुधार कानूनों से प्रभावित होती है. सुधीर पाल ने कहा कि राज्य की लगभग सवा करोड़ जनता चाहती है कि उन्हें उनकी भूमि पर मालिकाना हक मिले. लगभग ऐसे 77 लाख मतदाता हैं जो इन क्षेत्रों से आते हैं. बताया गया कि राज्य में भूमि सुधार और वन अधिकार कानून के तहत लगभग एक करोड़ 10 लाख लोग जुड़े हैं. अधिकारों का सही से पालन नहीं होने से ये लोग प्रभावित होते हैं. और ये जनता भी चाहती है कि इन मुद्दों को चुनावी एजेंडे के रूप में शामिल किय जायें और जो भी पार्टी विजेता होती है इस पर कार्य भी करे.

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14850 गांवों के लिए प्राथमिकता का सवाल

इस दौरान फादर जॉर्ज मोनोपल्ली ने कहा कि राज्य में कुल गांव 32000 हैं. इनमें से 14,850 गावों के लोगों से ये मुद्दा सीधे तौर पर जुड़ा है. और लोग चाहते हैं कि ये मुद्दे चुनावों में उभर कर आयें. इस क्रम में ये भी बताया गया कि इन कानूनों से लगभग 18 लाख हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती है. जो कानून का सही से पालन होने से सीधे ग्रामीणों के पास चली जाएगी. वास्तव में सत्ताधारी पार्टी चाहती ही नहीं है कि सही से इन कानूनों का पालन हो. किसी न किसी तरह से वन संसाधनों पर आदिवासियों का लगभग 60 फीसदी जीवन निर्भर रहता है. ऐसे में ये काफी महत्वपूर्ण है. इस आबादी के लिए जंगलों पर निर्भरता सबसे अधिक है, साथ ही ये इनकी प्राथमिकता भी है.

ये थे उपस्थित

मौके पर आम आदमी पार्टी के राजन कुमार, लक्ष्मी नारायण मुंडा, प्रफुल लिंडा, मनोज यादव समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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