न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

वन पट्टा मामला : रांची में आदिवासी युवाओं ने निकाला प्रतिरोध मार्च, पीएम और सीएम का जलाया पुतला

707

Ranchi : वन अधिकार कानून 2006 का अक्षरशः पालन करने की मांग को लेकर केंद्रीय आदिवासी मोर्चा द्वारा गुरुवार को प्रतिरोध मार्च निकाला गया. इस दौरान मोर्चा ने अल्बर्ट एक्का चौक पर सीएम रघुवर दास और पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया. वन अधिकार कानून और शीर्ष न्यायालय के फैसले के बाद आदिवासी युवाओं में सरकार के प्रति काफी नाराजगी है, जो आक्रोश मार्च में भी दिखा. आदिवासी युवाओं ने कहा कि एक तो सरकार न्यायालय में आदिवासियों की वस्तुस्थिति नहीं रखती है और जब न्यायालाय फैसला सुनाता है, तो उसके बाद उस पर स्टे का प्रयास करती है. यह खेल आदिवासियों के वजूद को चुनौती देने के समान है. प्रतिरोध मार्च रांची विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा. मार्च में शामिल युवाओं ने जमकर सरकार विरोधी नारेबजी की.

क्या 11 लाख लोग 13 दिसंबर 2005 के बाद जंगलों में घुसे : अलबिन लकड़ा

मोर्चा के महासचिव अलबिन लकड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का वन एवं वनभूमि से बेदखलीकरण का आदेश वन अधिकार कानून 2006 की मूल भावना के खिलाफ है, क्योंकि यह कानून 13 दिसंबर 2005 से पहले वनभूमि पर खेती करने एवं वनों में निवास करनेवाले आदिवासी एवं अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकार को मान्यता प्रदान करता है. क्या 11 लाख लोग 13 दिसंबर 2005 के बाद जंगलों के अंदर घुसे हैं? असल में केंद्र और राज्य सरकारों ने जानबूझकर वन अधिकार कानून को लागू नहीं किया है, ताकि जंगलों के अंदर पड़ी अकूत खनिज संपदा का दोहन करने के लिए इसे पूंजीपतियों को दी जा सके. इसके अलावा आदिवासियों को जंगलों से बाहर निकालने के बाद वनों के विकास के नाम पर भारत सरकार के खाते में कम्पा फंड के तहत रखे गये 55 हजार करोड़ रुपये से वन विभाग के बाबू और पूंजीपति मौज कर सके. इस आदेश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी के बीच के अंतर को भी खोलकर सामने रख दिया है.

अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है आदिवासी समाज : अजय टोप्पो

केंद्रीय आदिवासी मोर्चा के अध्यक्ष अजय टोप्पो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद वन आश्रित आदिवासी समुदाय बेदखली के कगार पर आ गया है. वन अधिकार कानून को केंद्र और राज्य सरकार ने कमजोर करने का प्रयास किया. सर्वोच्च न्यायालय में भी सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा. आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन पर लगातार हमला हो रहा है. ऐसे में हमने अपने जल, जंगल, जमीन की हिफाजत के लिए मार्च निकाला है, साथ ही पीएम और सीएम का पुतला फूंक रहे हैं. अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज किसी भी हद तक जा सकता है.

आदिवासी हैं, तो जंगल सुरक्षित है : अजय तिर्की

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि सरकार को बताना चाहते हैं कि आदिवासी जंगल में हैं, तब जंगल बचा हुआ है. आदिवासियों को वन पट्टा सही रूप से नहीं मिल रहा है और दावे को सरकार द्वारा खरिज किया जा रहा है, जो गलत है. सरकार कॉरपोरेट घरानों के हाथ बिक गयी है. जब आदिवासी बिगड़ेंगे, तो देश में अराजकता आ जायेगी. संगठन की ओर से अब अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आदिवासी समाज में जागरूकता लाने का काम किया जायेगा.

SMILE

सरकार आदिवासियों की भूमि लूटना चाहती है : कुलदीप तिर्की

प्रतिरोध मार्च में शामिल कुलदीप तिर्की ने कहा कि झारखंड और देशभर में वन क्षेत्र से बेदखल करने का काम सरकार कर रही है. सरकार आदिवासियों की भूमि लूटना चाहती है. वन क्षेत्र से आदिवासियों को बेदखल करने के न्यायालय के आदेश और उसके बाद उस पर स्टे का प्रयास करना, आदिवासियों के साथ खेल खेला जा रहा है. सरकार वन अधिकार कानून का अक्षरश: पालन करे.

प्रतिरोध मार्च में बड़ी संख्या में आदिवासी युवा शामिल हुए, जिनमें आदिवासी विकास परिषद के कुंदरसी मुंडा, पवन तिर्की, संदीप तिर्की, विकास तिर्की, सुजित कुजूर, माणिक तिर्की, सुनीता मुंडा, सलमान अली खान, तनवीर आलम, स्टेन स्वामी, पीसी मुर्मू, रतन तिर्की आदि शामिल थे.

इसे भी पढ़ें- विद्युत नियामक आयोग ने रच दिया इतिहास, बिजली वितरण निगम ने जितने का दिया प्रस्ताव, उससे ज्यादा बढ़ा…

इसे भी पढ़ें- एससी-एसटी को जंगल से अलग करने के खिलाफ किसानों का मार्च

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: