न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मंडल डैम के लिए मिला फॉरेस्ट क्लियरेंस, पीएम के झारखंड आगमन की तिथि तय होने से पहले पूरी की गयी प्रक्रिया

338
  • पांच जनवरी को पीएम 2500 करोड़ रुपये से बननेवाले मंडल डैम की रखेंगे आधारशिला
  • 1997 में डैम के कारण हुई थी भारी तबाही, 20 लोगों की गयी थी जान, अधीक्षण अभियंता की हुई थी गोली मारकर हत्या

Ranchi : झारखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तिथि तय होने से होने पहले ही मंडल डैम के फॉरेस्ट क्लियरेंस की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. स्टेज वन और स्टेज टू का फॉरेस्ट क्लियरेंस मिल चुका है. हालांकि, यह फॉरेस्ट क्लियरेंस कुछ शर्तों का सरलीकरण कर दिया गया है. इसमें 2266.72 एकड़ वन भूमि शामिल है. डैम निर्माण में 2500 करोड़ रुपये खर्च होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच जनवरी को इसकी आधारशिला रखेंगे. बता दें कि वर्ष 1972 से मंडल डैम का कार्य रुका हुआ था.

मंडल डैम से सरकार ने क्या रखा था लक्ष्य

उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) का निर्माण पलामू जिले की मुख्य नदी पर हो रहा है. यह परियोजना बड़े बांधों में से एक है. परियोजना स्थल का चयन, सर्वेक्षण एवं अन्वेषण कार्य 1966 के बाद किया गया था. वर्ष 1966-67 में उत्तरी कोयल परियोजना का निर्माण पलामू जिले की मुख्य नदी पर हो रहा है. 1970 में जब पूरे बिहार में अकाल पड़ा था, उस समय अकाल एवं सूखे से निजात पाने के लिए इस परियोजना को योजना आयोग, भारत सरकार के सामने स्वीकृति के लिए भेजा गया था. 1970 में इस परियोजना की अनुमानित राशि 30 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 44000 एकड़ कमान क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक संस्थानों के लिए जल आपूर्ति एवं 25 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन करने की योजना थी. योजना आयोग द्वारा योजना की स्वीकृति सन 1989 के सितंबर में मिली थी. लेकिन, निर्माण कार्य 1972 से 73 में ही शुरू किया गया था. वर्ष 1985 में पुनरीक्षित कर प्राक्कलित राशि को 439 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

222.40 फीट होगी ऊंचाई

इस बांध की ऊंचाई 222 .40 फीट है. इस परियोजना में 405 लाख एकड़ फीट पानी संचय करने का प्रावधान है. इस सिंचित पानी से सिंचाई करने हेतु मोहम्मदगंज में 2589 फीट लंबा बराज बनाया गया है. मोहम्मदगंज बराज से जिस मुख्य नहर का निर्माण किया गया है, उसकी लंबाई 110 किलोमीटर है. इसके अलावा औरंगाबाद जिले के 3,25,000 एकड़ तथा गया जिले के 75,000 एकड़ सकल कमान क्षेत्र में सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया था.

19 गांव हैं डूब क्षेत्र में शामिल

इस परियोजना में गढ़वा जिला के भंडरिया प्रखंड के 16 गांव तथा लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखंड के तीन गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं. इन 19 गांवों में 749 परिवारों के 6013 लोग विस्थापित होंगे. इसमें 5002 आदिवासी, 303 दलित तथा 681 अन्य जातियों के लोग शामिल हैं. डैम की वजह से 38,508.21 एकड़ भूमि जलमग्न होगी, जिसमें 3044.38 एकड़ रैयती जमीन, 12756.51 एकड़ गैर मजरुआ जमीन तथा 2266.72 एकड़ वनभूमि शामिल हैं.

बाढ़ से हो चुकी है भारी तबाही

छह अगस्त 1997 की रात में कुटकुट डूब क्षेत्र के 10 गांवों में पानी घुस गया, जिससे 20 व्यक्ति मर गये. उनमें दो पुरुष, पांच महिलाएं एवं 13 बच्चे शामिल थे. इस बाढ़ से 462 घर ढह गये, 438 क्विंटल भंडारित अनाज और 182 क्विंटल खेतों में डाले गये अनाज बर्बाद हो गये. 900 से ज्यादा मवेशी पानी में डूबकर मर गये एवं लाखों रुपये का घरेलू सामान नष्ट हो गया. नक्सली संगठन इस घटना को पार्टी यूनिटी इंजीनियर की तकनीकी गलती का परिणाम मानते थे. इसलिए, उन्होंने 16 अगस्त 1997 को अधीक्षण अभियंता बैजनाथ मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी और उन्होंने बांध के पाया को भी बम ब्लास्ट कर उड़ाने की कोशिश की थी.

इसे भी पढ़ें- तीसरी बार पलामू आयेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नये साल में देंगे कई सौगात

इसे भी पढ़ें- शिक्षा सुलभ, सुसंस्कृत होनी चाहिए : मोहन भागवत

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: