Ranchi

इंफ्रास्ट्रक्टचर डेवलपमेंट में फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी बाधा, 59 हजार एकड़ वन भूमि का क्लीयरेंस नहीं

  • विभिन्न प्रोजेक्टों के लिए पिछले चार साल में नहीं हो पाया फॉरेस्ट क्लीयरेंस
  • खनन क्षेत्र में 19516.35 व निजी कंपनियों के लिए 7413 एकड़ जमीन का फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं
  • ट्रांसमिशन लाइन 4018.07 और पावर प्रोजेक्ट के लिए 9735.49 एकड़ जमीन का क्लीयरेंस नहीं

Ranchi: प्रदेश में आधारभूत संरचनाओं (इंफ्रास्ट्रक्टर) के विकास में फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी बाधा बन गई है. विभिन्न परियोनाओं के निर्माण के लिए पिछले चार साल में लगभग 59 हजार एकड़ वन भूमि का फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं हो पाया है. झारखंड के जंगल की जमीन विकास योजनाओं के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टों के लिए दी गई.

लेकिन निजी और सरकारी उपक्रमों की उदासीनता और शर्तों के अनुपालन नहीं होने के कारण फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच अब तक फंसा हुआ है. अधिकांश वन भूमि पर क्लीयरेंस के लिए वन मंत्रालय ने आपत्ति भी जताई है. साथ ही वन विभाग को रिमांडर भी भेजा है. वर्तमान में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मौजूदा मूल्य प्रति हेक्टेयर 6.20 से 9.80 लाख रुपये तय की है.

कई प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू नहीं हो पाया

कई प्रोजेक्टों के लिए वन भूमि चिन्हित की गई थी. प्रस्ताव भी केंद्रीय वन मंत्रालय को भेजा गया. लेकिन शर्तों का अनुपालन नहीं होने के कारण जमीन का क्लीयरेंस नहीं हो पाया. इसमें प्रमुख रूप से प्रदेश में जल विद्युत परियोजना के लिए 4106.22 एकड़ वन भूमि का क्लीयेंस नहीं हो पाया. पन बिजली परियोजना के लिए 17 जगह चिन्हित किये गये थे.

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खनन में सबसे अधिक 19516.35 एकड़ वन भूमि का क्लीयरेंस नहीं

सबसे अधिक खनन क्षेत्र में 19516.35 एकड़ वन भूमि का क्लीरेंस नहीं हो पाया है. इसमें सीसीएल का 9124.44 एकड़, इसीएल का 2232.52, जेएसएमडीसी का 286.51 एकड़, टीवीएनल व बिजली बोर्ड का 426.57 एकड़, सेल का 5875.91 एकड़ और एचसीएल का 1570.40 एकड़ जमीन फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पेंच में फंसा हुआ है. वहीं राज्य सरकार के ट्रांसमिशन लाइन और पीजीसीआइएल के ट्रांसमिशन लाइन निर्माण में 4018.07 एकड़ वन भूमि का फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिला है.

पावर प्रोजेक्ट के लिए भी वन भूमि क्लीयर नहीं

पावर प्रोजेक्ट के लिए भी वन भूमि क्लीयर नहीं हो पाई है. इसमें डीवीसी के 633.30 एकड़, एनटीपीसी के 3708.06 एकड़ और इंट्रीग्रेडेड पावर डेवलपमेंट के लिए पावर फाइनांस कॉरपोरेशन का 5394.13 एकड़ वन भूमि का क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है. पावर सेक्टर में कुल 9735.49 एकड़ वन भूमि का क्लीयरेंस नहीं हो पाया है. इसी तरह सड़क में राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली पथ के लिए 244.53 एकड़ और एनएचएआई के लिए 4638.24 एकड़ वन भूमि पर क्लीयरेंस का पेंच फंसा हुआ है.

एमओयू में बड़ी बाधा फॉरेस्ट क्लीयरेंस भी

राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रोजेक्टों के लिए किये गये एमओयू में बड़ी बाधा फॉरेस्ट क्लीयरेंस भी है. फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने की वजह से प्रोजेक्टों में देरी हो रही है या फिर निवेशक दूसरे राज्यों की ओर अपना रूख कर रहे हैं. पिछले चार साल में मोमेंटम झारखंड सहित विभिन्न आयोजन में सरकार ने कुल 267 एमओयू किए, हकीकत यह है कि इसमें से सिर्फ 55 एमओयू पर ही काम चल रहा है.

अब तक कितनी फॉरेस्ट की जमीन परियोजनाओं के लिए दी गई

सिंचाई व पेयजल परियोजना- 12355.27 एकड़
सड़क निर्माण-  617.76 एकड़
ट्रांसमिशन लाइन- 1062.55 एकड़
रेलवे-  2718.15 एकड़
खनन-  17297.38 एकड़
पावर प्रोजेक्ट-  4942.10 एकड़
निजी कंपनी- 7413 एकड़

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किस परियोजना में कितनी जमीन पर फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच

खनन क्षेत्र: 19516.35 एकड़
ट्रांसमिशन: 4018.07 एकड़
सड़क: 4883.24 एकड़
पावर प्रोजेक्ट: 9735.49 एकड़
निजी कंपनी: 16411.77 एकड़
पन बिजली परियोजना: 4106.22 एकड़
आयडा: 276.98 एकड़
पेयजल: 30.27 एकड़

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