Opinion

मोदी सरकार में मंदी के साथ विदेशी निवेश भी 14 साल में सबसे कम

Girish Malviya

देश की आर्थिक वृद्धि के बारे में जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा का कहना है कि जीडीपी वृद्धि मार्च के 5.8 फीसदी से घटकर जून तिमाही में 5.7 फीसदी पर ही रह जाएगी. वित्त वर्ष 2018-19 में अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त होकर 6.8 फीसदी पर आ गई थी. यह 2014-15 के बाद का निम्न स्तर है.

अब तो आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास भी मान गए हैं कि जून 2019 के बाद आर्थिक गतिविधियों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी और बढ़ रही है.

इस बात के साफ संकेत हैं कि घरेलू मांग में और कमी आई है. उन्होंने कहा कि मई में भी औद्योगिक गतिविधियां लगातार थमती गई हैं, खासकर मैन्युफ़ैक्चरिंग और खनन में इसका साफ़ असर दिख रहा है.

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इस साल बेहद कम लोगों की सैलरी उनकी उम्मीदों के अनुरूप बढ़ी है. CMIE के आंकड़े बता रहे हैं कि निजी क्षेत्र में इस साल सैलरी वृद्धि 10 सालों के सबसे निचले स्तर पर रही है, बेरोजगारी में वृद्धि के साथ ही सैलरी में बेहद कम बढ़ोतरी ने देश के रोजगार के परिदृश्य को दोहरा झटका दिया है.

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) ने 2017-18 में पाया गया है कि देशभर में बेरोजगारी की दर फिलहाल 6.1% है, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है.

निवेश के स्तर पर भी देश मुश्किलों से जूझ रहा है, वित्त वर्ष 2018-19 में मुश्किल से 9.5 लाख करोड़ के निजी निवेश के आवेदन मिले हैं, जो 2004-05 के बाद चौदह वर्षों में न्यूनतम है. जीडीपी के लिहाज से विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत फिर फिसल कर सातवें स्थान पर आ गया है.

पिछले महीनों में डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने 70 के आंकड़े को पार कर लिया है. रुपये की घटती हुई कीमतों से और र बढ़ते राजकोषीय घाटे से भी अर्थव्यवस्था में दिक्कतें आई हैं…

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं)

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