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छह सालों से आदिम जनजाति की बुजुर्ग को नहीं मिल रहा पेंशन, अब खाने के भी पड़े लाले

आधार कार्ड के अभाव में राज्य में अब तक 13 लोगों की भूख से मौत के किये जा चुके हैं दावे

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Latehar : सूबे में आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था आज भी पूरी तरह से सही नहीं हो पायी है. इससे ग्रामीण इलाकों में आज भी आधार कार्ड के अभाव में लोग अपने अधिकारों को पाने से वंचित हैं. आधार के अभाव में कई बुजुर्ग पेंशन पाने से वंचित हैं. जबकि, आधार कार्ड के अभाव में राज्य में अब तक 13 लोगों की भूख से मौत होने के दावे भी किये जा चुके हैं. लातेहार जिला से भी ऐसा ही मामला सामने आया है.
दरअसल, जिले के मनिका प्रखंड स्थित लंका (उच्वाबाल) की रहनेवाली 80 वर्षीय आदिम जनजाति की बुजुर्ग महिला अमवा कुंवर को आधार कार्ड नहीं होने की वजह से पेंशन से वंचित होना पड़ा है. अमवा कुंवर को आखिरी बार पेंशन का भुगतान सितम्बर 2012 में हुआ था. अमवा को पेंशन की राशि उनके बैंक खाते के माध्यम से मिल रही थी, लेकिन सरकारी योजना में आधार नंबर की अनिवार्यता की वजह से अमवा को पेंशन नहीं मिल पा रही है. इसके अलावा अमवा जैसे ही कई जरूरतमंदों को भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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आधार कार्ड बनवाने के लिए दो बार दौड़ चुकी हैं प्रज्ञा केंद्र

जब पेंशन मिलनी बंद हो गयी, तो इस संबंध में अमवा कुंवर ने प्रखंड कार्यालय जाकर पता लगाया. इस बारे में अमवा से कहा गया कि पेंशन योजना के तहत आधार नंबर देना अनिवार्य है और उसके बाद ही पेंशन शुरू हो पायेगी. इसके बाद अमवा ने दो बार आधार केंद्र जाकर आधार कार्ड बनवाने की सारी प्रक्रिया पूरी की. लेकिन, प्रज्ञा केंद्र से मिली रसीद में अंकित नामांकन संख्या से पता करने पर स्थिति “अस्वीकृत” बताता है. वहीं, इस बारे में आधार प्रज्ञा केंद्र संचालक का कहना है कि अंगूठे का निशान फिंगर प्रिंट स्कैनर पर नहीं आने की वजह से आधार कार्ड अस्वीकृत किया गया होगा.

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माड़-भात खाकर गुजारा कर रही हैं अमवा कुंवर

अमवा एक तो बुजुर्ग हैं और काम करने में असमर्थ भी हैं. दूसरा पेंशन बंद होने की वजह से दो वक्त का खाना भी मुश्किल से नसीब हो पा रहा है. अमवा कुंवर सिर्फ माड़-भात खाकर अपना गुजारा कर रही हैं. अब हालात ऐसे हैं कि अमवा पोषाहार के अभाव में एक-एक दिन करके मृत्यु के करीब पहुंच रही हैं.

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क्या कहते हैं मनिका सीओ

पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए आधार अनिवार्य है, जिससे बुजुर्गों को लाभ से वंचित होना पड़ रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि प्रखंड की ओर से जिला के अधिकारियों को इस संबंध में लिखा गया है. लेकिन अंचल में इस संबंध में अभी तक कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है. साथ ही कहा कि अमवा कुंवर को पेंशन योजना का लाभ मिल सके, इसके लिए मैं प्रयास करूंगा.

सरकार की ओर से आदिम जनजाति के उत्थान के लिए कई घोषणाएं की जाती हैं. इसके अलावा विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ इन तक पहुंचाने का दावा भी किया जाता है. लेकिन, धरातल पर तस्वीर कुछ और ही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण अमवा कुंवर हैं, जो तिल-तिल करके मौत की ओर बढ़ रही हैं.

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