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40 सालों के इतिहास में पहली बार राज्यसभा का उपसभापति पद कांग्रेस से हुआ दूर

राज्यसभा का उपसभापति पद एनडीए के खाते में चले जाने से विपक्ष को करारा झटका लगा है.

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NewDelhi : राज्यसभा का उपसभापति पद एनडीए के खाते में चले जाने से विपक्ष को करारा झटका लगा है.  बता दें कि एनडीए प्रत्याशी हरिवंश ने कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की है. बता दें कि देश की आजादी के बाद भारत के इतिहास में तीसरी है कि कोई गैर कांग्रेसी उम्मीदवार इस पद पर बैठा हो.   1972-74 और 1974-77 में यह पद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के गोड़े मुरहरि के पास था. उसके बाद पिछले चालीस सालों के इतिहास में राज्यसभा का उपसभापति पद कांग्रेस के पास ही रहा था.

अब हरिवंश की जीत से कांग्रेस का विजय अभियान थम गया. खबरो के अनुसार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने इस हार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कई बार हम जीतते हैं तो कई बार हार भी जाते हैं.

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हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने राज्यसभा में भेजा

प्रभात खबर के प्रधान संपादक रहे हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने राज्यसभा में भेजा. उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है. हरिवंश सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता से जुड़े रहे और राजनीति में वह जयप्रकाश नारायण के आदर्शों से प्रेरित है.  यूपी के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश को जयप्रकाश नारायण  ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका टाइम्स ऑफ इंडिया समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ. वह टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग में 1981 तक उपसंपादक रहे.

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हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की

उन्होंने 1981-84 तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की. 1984 में उन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित रविवार साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे. हरिवंश  1990-91 के कुछ माह तक तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में रहे.  

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