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73 बरस में पहली बार डीजल हो सकता है 100 के पार, महंगाई पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी कांग्रेस

Ranchi: प्रदेश कांग्रेस के अनुसार देश में 73 सालों में पहली बार डीजल, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से रिकॉर्ड महंगाई बढ़ी है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति डॉ रामेश्वर उरांव की अध्यक्षता में बुधवार को कांग्रेस भवन में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक हुई.

इसमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार महंगाई के खिलाफ पार्टी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किये जाने की रूपरेखा पर चर्चा हुई.

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रामेश्वर उरांव ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमत आसमान छू रही है. पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गयी है जबकि डीजल की कीमत पिछले 73 वर्षों में पहली बार तेजी से उसका पीछा कर रही है. रसोई गैस की कीमत ने महिलाओं के रसोई घर का बजट बिगाड़ दिया गया है.

ऐसे में केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ व्यापक तौर पर कार्यक्रम चलाना जरूरी है. बैठक में पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश महतो कमलेश,राजेश ठाकुर सहित अन्य नेता भी उपस्थित थे.

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क्या है तैयारी

रामेश्वर उरांव के मुताबिक बढती महंगाई के कारण कारण आज लोग वर्ष 2014 से पहले का पुराना दिन वापस लौटने की कामना करते हैं. यूपीए शासनकाल में जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत उच्चतम दर पर थी, उस वक्त भी पेट्रोल-डीजल की कीमत इतनी नहीं बढ़ी थी.

वहीं यूपीए शासनकाल में जब कुछ पैसे की बढ़ोत्तरी होती थी तो भाजपा के केंद्र से लेकर प्रखंड स्तर के नेता सड़कों पर उतर आते थे. आज वही भाजपा नेता चुपचाप हैं.

मन ही मन अपनी ही केंद्र सरकार को कोसने को विवश हैं क्योंकि इस महंगाई का व्यापक असर उनके भी घरेलू बजट पर पड़ा है. अब कांग्रेस भी विरोध कार्यक्रम करेगी.

आगामी 11 जून को राज्यभर के सभी पेट्रोल पंप के सामने पार्टी कार्यकर्त्ता हाथों में तख्तियां लेकर कोरोना गाइडलाइन और सामाजिक दूरी के आदेश का पालन करते हुए प्रतीकात्मक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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13 महीनों में पेट्रोल की कीमत में 25 रुपये की बढोत्तरी

केंद्र सरकार ने पिछले 13 महीनों में पेट्रोल की कीमत में लगभग 25 रुपये (24.90) और डीजल की 23.09 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दी है. यह केंद्र सरकार की मुनाफाखोरी को दर्शाता है.

2014 में कच्चे तेल की कीमत जब 108 रुपये प्रति बैरल हुआ करती थी, तब यूपीए शासनकाल में पेट्रोल 71.51 पैसे प्रति लीटर और डीजल 55. 49 पैसे प्रति लीटर उपलब्ध हुआ करता था.

पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल पर 7 साल में अनर्गल टैक्स लगाकर 22 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा कमायी है जबकि पिछले 7 सालों में कच्चा तेल 20 रुपये से 65 रुपये प्रति बैरल के नीचे आ गया.

यहां तक कि एक बार तो 10 रुपये प्रति बैरल तक कच्चे तेल की कीमत हो गई थी. इसके बावजूद देश की जनता को कोई फायदा नहीं मिला.

उल्टे पेट्रोल और डीजल की कीमत 100 के आसपास पहुंच गई है और 73 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बराबर हो गई हैं जिसकी वजह से खाद्य पदार्थों से लेकर हर चीज की कीमत बढ़ गई है.

1 अप्रैल 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 पैसे लिए जाते थे और आज जून 2021 में 32.90 वसूले जाते हैं. डीजल में 1 अप्रैल 2014 में 3.56 रुपया था.

जून 2021 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 31.80 रुपये कर दिया गया है. वहीं रसोई गैस की कीमत 400 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये तक पहुंचा दी गयी है.

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